क्या गलतफहमी में रहने का सदमा कुछ नही होता
वो तो सब कुछ जानती थी समझा तो सकती थी
क्या इश्क से बचकर भागनें वाले बेवफ़ा नही होता..
इश्क में पड़ जाने में भी बंदे का बचता कुछ नही
लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने ज़ख्म खाए हैं इस दिल पर तब ये अंदाज़ आया है..! A6
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”