चल मुशाफिर चल ........
यादों के इस शहर से दूर
गम के शरहद के उस पर
तेरी मंज़िल ...चल मुशाफिर चल ...
लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने नज़र अंदाज़ हुए हैं तब ये अंदाज़ आया है..!
Friday, 24 July 2015
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