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Friday, 31 May 2024

जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो

जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो 
तुम ढ़ेर सारा वक़्त लेकर आना

जब भी मैं कहूँ सब कुछ ठीक है तो
तुम मेरे पास हाथे थामे बैठे रहना

जब भी मैं कहूँ थका हुआ हूँ
तुम मुस्कुराते हुए मुझ से बातें करना

जब भी मैं कहूँ कि हार गया हूँ
तुम पहली मुलाक़ात की बातें सुनाना

जब भी मैं कहूँ मेरे पास कुछ नही बचा है
तुम मेरे पास होने का एहसास दिलाना

Wednesday, 29 May 2024

नक्शा उठा कर देखा तो 
बगल के शहर में भी 
कोई अपना रहता है

इस शहर में 
दिल नही लगता 
पास के शहर में जाकर
आशियाना ढूंढता हूँ

Monday, 8 April 2024

फुर्सत में यारों के साथ यादों की बस्ती में

यादें झांकती है टूटी हुई खिड़की से अक्सर
मैं चेहरा छुपाये घूमता हूँ तेरे उजड़े हुए शहर से

अक्सर न मिलनें की उम्मीद से आता हूँ तेरी गली में
प्रतीक्षा में  ख़ुद की छोड़ आता हूँ तेरी गली में खुद को

आते जाते राहगीर  पूछते हैं ख़ैरियत मुझसे
हर बार तेरा जैसा हाल कह देता हूँ उससे


Wednesday, 14 February 2024

आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं

161,164 का बयान, मेडिकल टेस्ट और केस डिस्पोजल तो होते रहेगा

परंतु

उस माँ, पिता को भी हिम्मत दीजियेगा..
उनके आँखों के अंशु को जरूर पोछियेगा..
जिनके जवान बेटा, बेटी मोहब्बत में जान गवां दियें..

और अंत में
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं

Thursday, 8 February 2024

उसके जाने के बाद ....

उसके जाने के बाद ....
एक तुलसी अपने आँगन में लगा रखा है
बहुत जतन से अपने आंसुओं से उसे सींचा है

उसके जाने के बाद....
जीवन मे छाया घनघोर अँधेरा है
एक जुगनू को देखकर 
सारी रात अंधेरे में हमने गुजारा है

उसके जाने के बाद....
उसकी आवाज़ कानों में बहुत शोर करती है
पीछे मुड़ के छुप कर ये आँखें बहुत रोती है

उसके लौट आने के इंतज़ार में....
सारी रात दरवाजा खुला रखा है
बेदर्द आँखें लौटने का  ख़्वाब देखती है

Monday, 15 January 2024

ये ठंड की रात और आवारा हवा 
ये आग और नींद का बोझ
ये वर्दी और लाल जूता 
ये तकलीफ और ग़ैरों का शहर 

और अंत में

अगर अपना शहर होता तो 
अभी तक घर  चल गए होते

Thursday, 11 January 2024

शहर खाली पड़ा है..... कब्रिस्तान में भीड़ है...

शहर खाली पड़ा है
कब्रिस्तान में भीड़ है
        चूल्हे में सिर्फ़ राख बचा है
        शमशान में आग लगी है
समुंद्र ठहरा हुआ है
मन में तूफान मचा है
         बादल  साफ़ है
         आँखों में मूसलाधार बारिश लगा है

और अंत में

भीड़ में शामिल हूँ
फिर भी अकेला तन्हा हूँ

Monday, 18 December 2023

वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें थाने में

आओ और मिलो मेरे पुराने  दोस्तों से
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें थाने में

आओ और मिलो मेरे गाँव के  वादियों से
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें वर्दी में

आओ और पढ़ो मेरे लिखे शेरो और शायरी को
वैसा नही हूँ जैसे लिखता हूँ केस डायरी में

आओ और मिलो मेरे सपनों की बस्ती में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें रात्रि गस्ती में

और अंत में

आओ और मिलो मुझसे  सच सुनो अकेले में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें कोर्ट कचहरी में

जाते जाते

आओ और मिलो मुझसे कभी छुट्टी में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें ड्यूटी में

Saturday, 9 December 2023

उसके शहर से भूखा वापस आया हूँ
ये तो तोहीन है उसकी रसोईघर की

Monday, 13 November 2023

दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

इस  दीपावली भी पिछली साल की तरह गुजर रही है
उसकी आँखों के काजल को  देखे बिना 

वनवास तो खत्म हो गया
फिर भी मिलने की आस नही

और अंत में

अपनी भाग्यश्री लक्ष्मी को भी...
इस अमावस की रात को...

दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं
🎆🎇🎊🎊🎉🎉🪄🪄🎇🎇🎆🎆

Sunday, 12 November 2023

दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं

अरसो हो गए हैं,
उसकी आँखों के काजल को देखे बिना

वनवास तो खत्म हो गया
फिर भी मिलने की आस नही

जिनसे मिल नही पता हूँ

उन्हें भी इस अमावस की रात को

दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं
🎆🎇🎊🎊🎁🎉🎉🪄🪄🎇🎇🎆🎆

Friday, 27 October 2023

दुनियाँ का सबसे बड़ी सजा खुद को दूँगा

दुनियाँ का सबसे बड़ी सजा खुद को दूँगा
जिसे मैं चाहता हूँ उसका हो जाऊँगा

रुक रुक कर वक़्त को रोकता रहता हूँ
दो कदम उसका हाथ थामे साथ चलता रहूँगा

मुझे अरसे हो गए हैं उसे देखे बिना
सुन रखा है पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई है

और अंत में

सुने हैं इस दशहरा पगली झुमका खरीद रही थी
अब उसे कैसे बताएं
पिछले दशहरे में ही उसके लिए झुमका खरीद रखा है

Friday, 15 September 2023

अपने पल्लू में एक ऐसी जड़ी बाँध लो...
जिससे  तेरा मेरा और मेरा तेरा होने का एहसास हो

Monday, 11 September 2023

वो खुदगर्ज है...।

जो तुझे देख कर 
तेरा न हो पाया
वो खुदगर्ज है...।

जो तेरा होकर
तुझ से मिल न पाया
वो भी बहुत खुदगर्ज है..।।

Tuesday, 25 July 2023

वो मेरे भेजे हुए सारे पत्र को संभाल कर रखती है
वो शाम को उसपर भूँजा, नमक और तीखा मिर्च रखती है

और कहती है सब कुछ ठीक है
थोड़ा नमक के साथ मिर्च और ज्यादा तीखा होना चाहिए

अनजानें शहर में

अनजानें शहर में
गली गली गाँव गाँव मुसाफिर बन फिरता हूँ

ना जानें कब से 
अपना शहर गाँव गली छोड़ कर भटकता फिरता हूँ

ना किसी का सुनने वाला
हर किसी का बातें ध्यान से सुनता फिरता हूँ

डूबते सूरज के साथ
रातभर सोते शहर में अकेले जागते फिरता हूँ

बस्ती बस्ती घोर अंधेरा 
आशा बन रात भर चलते जलते फिरता हूँ

अनजाने शहर को
अपना समझ कर हर वक़्त तैनात रहते फिरता हूँ