लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने ज़ख्म खाए हैं इस दिल पर तब ये अंदाज़ आया है..! A6
Tuesday, 13 May 2025
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 14 January 2025
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 12 October 2024
सिद्धिदात्री
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 23 August 2024
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 31 May 2024
जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो
जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो
तुम ढ़ेर सारा वक़्त लेकर आना
जब भी मैं कहूँ सब कुछ ठीक है तो
तुम मेरे पास हाथे थामे बैठे रहना
जब भी मैं कहूँ थका हुआ हूँ
तुम मुस्कुराते हुए मुझ से बातें करना
जब भी मैं कहूँ कि हार गया हूँ
तुम पहली मुलाक़ात की बातें सुनाना
जब भी मैं कहूँ मेरे पास कुछ नही बचा है
तुम मेरे पास होने का एहसास दिलाना
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“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 29 May 2024
नक्शा उठा कर देखा तो
बगल के शहर में भी
कोई अपना रहता है
इस शहर में
दिल नही लगता
पास के शहर में जाकर
आशियाना ढूंढता हूँ
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“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 8 April 2024
फुर्सत में यारों के साथ यादों की बस्ती में
यादें झांकती है टूटी हुई खिड़की से अक्सर
मैं चेहरा छुपाये घूमता हूँ तेरे उजड़े हुए शहर से
अक्सर न मिलनें की उम्मीद से आता हूँ तेरी गली में
प्रतीक्षा में ख़ुद की छोड़ आता हूँ तेरी गली में खुद को
आते जाते राहगीर पूछते हैं ख़ैरियत मुझसे
हर बार तेरा जैसा हाल कह देता हूँ उससे
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“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 5 March 2024
@प्रतीक
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 3 March 2024
@420 D coy
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“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 14 February 2024
आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं
161,164 का बयान, मेडिकल टेस्ट और केस डिस्पोजल तो होते रहेगा
परंतु
उस माँ, पिता को भी हिम्मत दीजियेगा..
उनके आँखों के अंशु को जरूर पोछियेगा..
जिनके जवान बेटा, बेटी मोहब्बत में जान गवां दियें..
और अंत में
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं
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“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 8 February 2024
उसके जाने के बाद ....
उसके जाने के बाद ....
एक तुलसी अपने आँगन में लगा रखा है
बहुत जतन से अपने आंसुओं से उसे सींचा है
उसके जाने के बाद....
जीवन मे छाया घनघोर अँधेरा है
एक जुगनू को देखकर
सारी रात अंधेरे में हमने गुजारा है
उसके जाने के बाद....
उसकी आवाज़ कानों में बहुत शोर करती है
पीछे मुड़ के छुप कर ये आँखें बहुत रोती है
उसके लौट आने के इंतज़ार में....
सारी रात दरवाजा खुला रखा है
बेदर्द आँखें लौटने का ख़्वाब देखती है
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 5 February 2024
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 28 January 2024
घर तोड़ा नही उसने
बल्कि मेरा घर उजार दिया
तिनका तिनका से सजाया था
बेरहम ने राख में मिला दिया
नदियों का सौख नही मुझको
इन आँखों ने समुद्र देखा है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 27 January 2024
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 17 January 2024
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 15 January 2024
ये ठंड की रात और आवारा हवा
ये आग और नींद का बोझ
ये वर्दी और लाल जूता
ये तकलीफ और ग़ैरों का शहर
और अंत में
अगर अपना शहर होता तो
अभी तक घर चल गए होते
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 14 January 2024
एक ख्वाहिश थी कि जिंदगी तुम्हारे साथ गुजरे..
अब ख्वाहिश है कि तुम्हारा हमारा उम्र भर सामना न हो...
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 11 January 2024
शहर खाली पड़ा है..... कब्रिस्तान में भीड़ है...
शहर खाली पड़ा है
कब्रिस्तान में भीड़ है
चूल्हे में सिर्फ़ राख बचा है
शमशान में आग लगी है
समुंद्र ठहरा हुआ है
मन में तूफान मचा है
बादल साफ़ है
आँखों में मूसलाधार बारिश लगा है
और अंत में
भीड़ में शामिल हूँ
फिर भी अकेला तन्हा हूँ
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 7 January 2024
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 18 December 2023
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें थाने में
आओ और मिलो मेरे पुराने दोस्तों से
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें थाने में
आओ और मिलो मेरे गाँव के वादियों से
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें वर्दी में
आओ और पढ़ो मेरे लिखे शेरो और शायरी को
वैसा नही हूँ जैसे लिखता हूँ केस डायरी में
आओ और मिलो मेरे सपनों की बस्ती में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें रात्रि गस्ती में
और अंत में
आओ और मिलो मुझसे सच सुनो अकेले में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें कोर्ट कचहरी में
जाते जाते
आओ और मिलो मुझसे कभी छुट्टी में
वैसा नही हूँ जैसे मिलता हूँ तुम्हें ड्यूटी में
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क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
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