लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने नज़र अंदाज़ हुए हैं तब ये अंदाज़ आया है..!
Tuesday, 26 May 2026
Tuesday, 13 May 2025
Tuesday, 14 January 2025
Saturday, 12 October 2024
Friday, 23 August 2024
Friday, 31 May 2024
जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो
जब भी मैं कुछ तुमसे मांगू तो
तुम ढ़ेर सारा वक़्त लेकर आना
जब भी मैं कहूँ सब कुछ ठीक है तो
तुम मेरे पास हाथे थामे बैठे रहना
जब भी मैं कहूँ थका हुआ हूँ
तुम मुस्कुराते हुए मुझ से बातें करना
जब भी मैं कहूँ कि हार गया हूँ
तुम पहली मुलाक़ात की बातें सुनाना
जब भी मैं कहूँ मेरे पास कुछ नही बचा है
तुम मेरे पास होने का एहसास दिलाना
Wednesday, 29 May 2024
नक्शा उठा कर देखा तो
बगल के शहर में भी
कोई अपना रहता है
इस शहर में
दिल नही लगता
पास के शहर में जाकर
आशियाना ढूंढता हूँ
Monday, 8 April 2024
फुर्सत में यारों के साथ यादों की बस्ती में
यादें झांकती है टूटी हुई खिड़की से अक्सर
मैं चेहरा छुपाये घूमता हूँ तेरे उजड़े हुए शहर से
अक्सर न मिलनें की उम्मीद से आता हूँ तेरी गली में
प्रतीक्षा में ख़ुद की छोड़ आता हूँ तेरी गली में खुद को
आते जाते राहगीर पूछते हैं ख़ैरियत मुझसे
हर बार तेरा जैसा हाल कह देता हूँ उससे
Tuesday, 5 March 2024
Sunday, 3 March 2024
Wednesday, 14 February 2024
आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं
161,164 का बयान, मेडिकल टेस्ट और केस डिस्पोजल तो होते रहेगा
परंतु
उस माँ, पिता को भी हिम्मत दीजियेगा..
उनके आँखों के अंशु को जरूर पोछियेगा..
जिनके जवान बेटा, बेटी मोहब्बत में जान गवां दियें..
और अंत में
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आप सभी को निश्छल स्नेह दिवस की शुभकामनाएं
Thursday, 8 February 2024
उसके जाने के बाद ....
उसके जाने के बाद ....
एक तुलसी अपने आँगन में लगा रखा है
बहुत जतन से अपने आंसुओं से उसे सींचा है
उसके जाने के बाद....
जीवन मे छाया घनघोर अँधेरा है
एक जुगनू को देखकर
सारी रात अंधेरे में हमने गुजारा है
उसके जाने के बाद....
उसकी आवाज़ कानों में बहुत शोर करती है
पीछे मुड़ के छुप कर ये आँखें बहुत रोती है
उसके लौट आने के इंतज़ार में....
सारी रात दरवाजा खुला रखा है
बेदर्द आँखें लौटने का ख़्वाब देखती है
Monday, 5 February 2024
Sunday, 28 January 2024
Saturday, 27 January 2024
Wednesday, 17 January 2024
Monday, 15 January 2024
ये ठंड की रात और आवारा हवा
ये आग और नींद का बोझ
ये वर्दी और लाल जूता
ये तकलीफ और ग़ैरों का शहर
और अंत में
अगर अपना शहर होता तो
अभी तक घर चल गए होते
Sunday, 14 January 2024
Thursday, 11 January 2024
शहर खाली पड़ा है..... कब्रिस्तान में भीड़ है...
शहर खाली पड़ा है
कब्रिस्तान में भीड़ है
चूल्हे में सिर्फ़ राख बचा है
शमशान में आग लगी है
समुंद्र ठहरा हुआ है
मन में तूफान मचा है
बादल साफ़ है
आँखों में मूसलाधार बारिश लगा है
और अंत में
भीड़ में शामिल हूँ
फिर भी अकेला तन्हा हूँ
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