Thursday, 8 October 2015

चोर से मेरी मुलाक़ात

कुछ दिन पहले की बात है एक लड़का मुझ से मिला और मेरे साथ दुकान पर गया । उसे कुछ सामान लेना था, दुकानदार उसको सामान देनें लगा और उसी बीच यह लड़का कुछ सामान चोरी कर लेता है इस बात की भनक मुझे भी नही लगी। दुकान से बाहर निकलने के कुछ दूर बाद मैनें देखा जो सामान खरीदा भी नही है वह भी उसके पास था ..मामला पूरी तरह समझनें में देर नही लगी।
इस से पहले कि मैं कुछ पूछता वह बोल परा ...

यह सब होते रहता है.....
इसी को कहते हैं अनुभव ....
अगर तुम तेज़ होते तो सामान उठा कर दिखाते...
हम होशियार थे तब ना उसके सामने रहते यह सब कम किये ना की पीठ-पीछे...
हिम्मत इसको कहते हैं दिखाना..
कमज़ोर आदमी की बस की बात नही है...
इस तरह का काम करना मेरा शौक है....
उसका सामान लिए हैं तुम्हारा क्या है...
जिसका लिए हैं वह बहुत बड़ा बेईमान है...
समझा की नही समझा...

यह सब सुन कर मेरा मन अशांत हो गया है उसके एक भी सवाल का जवाब नही दे पाया....

क्या इसी को कहते हैं तेज होना ?
क्या यही होशियार की पहचान है ?
क्या हिम्मत दिखाने का सही अर्थ यही होता है ?

"चोरी की ईंट से बनाया गया मकान
कभी भी ईमानदारी का छाँव नही देता"

इस बात को उसको कैसे बतायें ?

ईमानदरी ही सर्वोपरि गुण होता है। यह बाज़ार में नही मिलती है जो जरूरत पड़ने पर कोई ख़रीद ले।
..
अब यक्ष प्रश्न यह है कि इस हालत में मैं क्या करूँ ?

Wednesday, 7 October 2015

पगली

ऊपर वाले तेरी दुनिया कितनी अजब निराली है
कोई समेट नहीं पाता है किसी का दामन खाली है
एक कहानी तुम्हें सुनाऊँ एक किस्मत की हेठी का
न ये किस्सा धन दौलत का न ये किस्सा रोटी का
साधारण से घर में जन्मी लाड़ प्यार में पली बढ़ी थी
अभी अभी दहलीज पे आ के यौवन की वो खड़ी हुई थी
वो कालेज में पढने जाती थी कुछ-कुछ सकुचाई सी
कुछ इठलाती कुछ बल खाती और कुछ-कुछ शरमाई सी
प्रेम जाल में फँस के एक दिन वो लड़की पामाल हो गई
लूट लिया सब कुछ प्रेमी ने आखिर में कंगाल हो गई
पहले प्रेमी ने ठुकराया फिर घर वाले भी रूठ गए
वो लड़की पागल-सी हो गई सारे रिश्ते टूट गए

अभी-अभी वो पागल लड़की नए शहर में आई है
उसका साथी कोई नहीं है बस केवल परछाई है
उलझ- उलझे बाल हैं उसके सूरत अजब निराली-सी
पर दिखने में लगती है बिलकुल भोली-भाली-सी
झाडू लिए हाथ में अपने सड़कें रोज बुहारा करती
हर आने जाने वाले को हँसते हुए निहारा करती
कभी ज़ोर से रोने लगती कभी गीत वो गाती है
कभी ज़ोर से हँसने लगती और कभी चिल्लाती है
कपड़े फटे हुए हैं उसके जिनसे यौवन झाँक रहा है
केवल एक साड़ी का टुकड़ा खुले बदन को ढाँक रहा है

भूख की मारी वो बेचारी एक होटल पर खड़ी हुई है
आखिर कोई तो कुछ देगा इसी बात पे अड़ी हुई है
गली-मोहल्ले में वो भटकी चौखट-चौखट पर चिल्लाई
लेकिन उसके मन की पीड़ा कहीं किसी को रास न आई
उसको रोटी नहीं मिली है कूड़ेदान में खोज रही है
कैसे उसकी भूख मिटेगी मेरी कलम भी सोच रही है
दिल कहता है कल पूछूंगा किस माँ-बाप की बेटी है
जाने कब से सोई नहीं है जाने कब से भूखी है
ज़ुर्म बताओ पहले उसका जिसकी सज़ा वो झेल रही है
गर्मी-सर्दी और बारिश में तूफानों से खेल रही है

शहर के बाहर पेड़ के नीचे उसका रैन बसेरा है
वहीँ रात कटती है उसकी होता वहीँ सवेरा है
रात गए उसकी चीखों ने सन्नाटे को तोडा है
जाने कब तक कुछ गुंडों ने उसका जिस्म निचोड़ा है
पुलिस तलाश रही है उनको जिनने ये कुकर्म किया है
आज चिकित्सालय में उसने एक बच्चे को जन्म दिया है
कहते हैं तू कण-कण में है तुझको तो सब कुछ दिखता है
हे ईश्वर क्या तू नारी की ऐसी भी क़िस्मत लिखता है
उस पगली की क़िस्मत तूने ये कैसी लिख डाली है
गोद भर गई है उसकी पर मांग अभी तक खाली है --

हमने उनको भी छुप छुप कर आते देखा है उन गलियों में !

वेश्या ,रंडी, धंधेवाली  

हमारे सभ्य संस्कारी समाज पर काला धब्बा … यही कहते है ना हम सब हमेशा . 

कभी सोचा है इनको ये सब करने पर मजबूर किसने किया, ऐसी क्या मजबूरियां हुई कि एक नारी को अपने जिस्म का सौदा करना पड़ता है. ना चाहकर भी चंद रुपयों के लिए 10-15 भेड़ियों से रोज़ अपने जिस्म को नुचवाना पड़ता है.

नरक से भी बदतर जिन्दगी, ना सुबह का पता चलता है ना शाम का. कहने को तो इन्हें रात की रानी कहा जाता है पर ना जीते जी कोई इनकी खबर लेता है ना मरने के बाद इनका कुछ पता चलता है. इनके बच्चे अगर किस्मत वाले हुए तो किसी समाजसेवी संस्था के जरिये इस दलदल से बाहर निकल कर सामान्य जिंदगी बिताते है और अगर बदकिस्मती से उसी अँधेरे में रह गए तो लड़के अधिकतर अपराधी या दलाल बन जाते है और लड़कियां किसी कोठे की रौनक.

रेड लाइट एरिया जिन्हें हम शहर की गंदगी कहते है,  क्या कभी सोचा है कि हर छोटे बड़े शहर में कहीं खुले आम तो कहीं चोरी छुपे ऐसे रेड लाइट एरिया क्यों होते है.

इसका जवाब अमरप्रेम फिल्म के एक गाने में बखूबी दिया है जिसके बोल है

“हमको जो ताने देते है हम खोये है इन रंगरलियों में, हमने उनको भी छुप छुप कर आते देखा है उन गलियों में”

सामने से इन्हें भला बुरा कहने वाले भी कहीं ना कहीं इन वेश्याओं से आकर्षित हो ही जाते है.

क्या आप जानते है कि एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया कहीं और नहीं हमारे देश भारत में ही है.

कोलकाता का सोनागाछी इलाका.

इस क्षेत्र के बारे तरह तरह की कहानियां प्रचलित है कुछ सच्ची कुछ झूठी.

चिड़ियाघर में पिंजरे में कैद जानवरों की हालत से भी बदतर हालत होती है सोनागाछी में इन छोटे छोटे दडबे जैसे पिंजरों में कैद लड़कियों की. जिनकी नुमाइश होती है सडक पर जिससे आते जाते ग्राहक उनकी अदाओं के जाल में फंस जाए.

कुछ ऐसा नज़ारा होता है दिन में सोनागाछी के कोठों का. दिन में इन वेश्याओं को देखकर कहीं से भी नहीं लगता कि ये हमसे अलग है.

लगेगा भी कैसे किसी के चेहरे पर थोड़ी लिखा होता है कि वो वेश्या है.

सोनागाछी की वेश्या भी होती तो आखिर इंसान ही है. इन्हें भी प्यार दुलार रिश्ते नाते दोस्ती करने का मैन करता है. जहाँ थोडा स स्नेह मिलता है वहीँ ये अपना सारा दुःख दर्द भूल जाती है, भले ही दो पल के लिए सही.

कहने को तो ये वेश्याएं है पर इनके भी परिवार होते है. दिन रात अपने जिस्म का सौदा करके भी इन्हें कोई सुख सुविधा नहीं मिलती.

कहने को तो वेश्यावृत्ति का व्यापार बहुत बड़ा है पर अधिकतर पैसा वेश्याओं को नहीं उनके मालिकों, दलालों की जेबों में जाता है. वेश्याओं को तो बस मिलता है कुछ पैसा और ढेर सारा अपमान और परेशानियाँ.

यौन रोग वेश्याओं में सबसे बड़ी समस्या होती है.  सोनागाछी में ना साफ़ सफाई है ना ही कोई व्यवस्था. यहाँ आने वाले अधिकतर ग्राहक भी गरीब और शराबी होते है . उनके साथ सेक्स करते समय सबसे बड़ा डर एड्स या किसी अन्य प्रकार की बीमारी का होता है. ऐसे में समय समय पर कुछ समाज सेवी संस्थाएं इन वेश्याओं को कंडोम वितरित करती रहती है और यौन संक्रमण से बचने के तरीके भी बताती है.

सोनागाछी की बहुत सी वेश्याएं पडौसी देश बांग्लादेश से आती है. अत्यधिक गरीबी की वजह से परिवार पालने के लिए वो भारत इस उम्मीद से आती है कि उन्हें यहाँ कोइ रोजगार  मिल जायेगा. लेकिन दलालों और जिस्मफरोशी के ठेकेदारों के चंगुल में फंसकर वो जीते जी नरक में धकेल दी जाती है .

सडक पर बिकने वाले मुर्गे और बकरों की तरह सोनागाछी में इंसानों का बाज़ार लगता है. अपने अपने कोठे या कमरे के बाहर खडी होकर ये बदनसीब औरतें और लड़कियां अपने जिस्म नोचने वालों को रिझाती नज़र आती है.

देखा आपने जिन्हें हम गालियाँ देते रहते है वो बेचारी वेश्याएं किस नरक में रहती है.

वो भी आपकी हमारी तरह इंसान है उन्हें भी जीने का हक है. लेकिन इस धंधे में वो बस एक जिंदा लाश बनकर रह जाती है. जहाँ दिन रात अंधेरी कोठरियों में उनका जिस्म कुचला जाता है.

आत्मा तो उनकी पहले ही मर चुकी होती है और उस आत्मा की हत्या करने वाले होते है हम और हमारा समाज…

Monday, 5 October 2015

भिखारी

कुछ बच्चें जो कि एक विद्यालय के विद्यार्थी थे।
गाँव के खेतों के रास्तों से होते हुए अपने विद्यालय जा रहे थे। 
तभी उनकी नजर एक भिखारी पर पड़ी वह भूखा प्यासा लोगो से पैसे माँग रहा था उसे देख सभी विद्यार्थी के मन में ढेरो सवाल उठने लगे। विद्यार्थी विद्यालय पहुँचते ही.......
उनके विद्यालय के अध्यापक जो सभी विद्यार्थीयों के चहेतें थे तथा सभी विद्यार्थी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे।
उनके पास पहुँचें और बोल पड़े- सर भिखारी कौन होते है ?
लोग भिख क्यों माँगते है?
जैसे ढेरो सवाल अध्यापक के सामने थे।
अध्यापक ने मुस्कुराकर कहा-मैं तुम सभी के सवालो का जवाब दुँगा। तुम सब अपने कक्ष में चलों।
सभी विद्यार्थी कक्ष में अध्यापक का बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
अध्यापक ने आते ही ब्लैक बोर्ड पर लिखा 

‘‘सच्ची मदद‘‘ 
और कहा-
‘‘ मैं आज आप सभी को एक कहानी सुनाना चाँहता हूँ।

एक पिता अपने बेटे के साथ घर के बाहर खेल रहा था।
कि तभी उनके पास एक भिखारी आया जो कि 15-16 साल का एक बालक था उसने कहा- ‘‘ मालिक 3दिन से भूखा हूँ कुछ पैसे दे दो.....रहम करो....भगवान अपका भला करेगा...आपका बेटा खूब नाम कमायेगा‘‘ ।
पास खड़े बेटे को जिसकी उम्र 10 वर्ष थी उसे भिखारी की ज्यादा बातें तो समझ नहीं आयीं पर वो इतना तो समझ गया कि भिखारी को भूख लगी है और उसे पैसे चाहिये...
बेटे ने अपने पिता से कहा - ‘‘पापा इसे पैसे दे दो न‘‘।
पिता ने मुस्कुराकर कहा-तुम पहले जाओं अपनी माँ से कुछ खाने का लाओं और इसें खाना खिलाओं।
बेटे ने भिखारी को खाना लाकर दे दिया।
भिखारी ने पेट भर खाना खाया और कहा- ‘‘ साहब आप तो अमीर है, खुदा की मूरत है, दयालू है, थोड़े पैसे और दे दो सहाब।
पिता ने भिखारी को देखा फिर चारो ओर देखा और कहा-
‘‘ सामने मेरी कार खड़ी है तुम उसे साफ कर दो मैं तुम्हे 50 रूपये दूँगा।
भिखारी ने सोचा और कहा - ‘‘ पानी और कपड़ा कहा से लू सहाब।
उसने गाड़ी साफ की और 50 रू लेकर चला गया।
इस तरह अब वो रोज आता और सभी के घर जाकर कहता साहब मैं अपकी गाड़ी साफ कर दुँ।
बस इस तरह पैसे कमा कर वो अपना पेट भरने लगा और अब लोग उसे भिखारी नहीं कहते थे।
अध्यापक ने अचानक विद्यार्थीयों की और देखा तो पाया कि सभी विद्यार्थीयों के चहरे पर मुस्कान हैं।
अध्यापक ने कहा - सुनो बच्चों
अगर पिता उस दिन भिखारी को पैसे दे देता तो....
भिखारी को लगता कि रोने से गिड़गिडाने से पैसे मिल जाते है और वो दूसरे दिन किसी ओर के पास जाकर भिख माँगता और जिन्दगी भर भिखारी ही कहलाता।
भिखारी वो इंसान होता है जो बिना मेहनत किये अपना पेट भरना चाँहता है।
अगर किसी इंसान कि मदद करना हो तो ऐसी करो जिससे वह सही रास्ते पर चल सके।
इसे ही कहते है - ‘‘सच्ची मदद‘‘

संदेश- इस समाज को भिखारी हम लोग देते है... हमारे कारण ही एक इंसान भिखारी बनता हैं....‘‘सच्ची मदद‘‘करना सिखिए।

Sunday, 4 October 2015

आग में फंसी मां और गर्लफ्रेंड में से किसे बचाना चाहेंगे आप? 

~~आग में फंसी मां और गर्लफ्रेंड में से किसे बचाना चाहेंगे आप? ~~

एक ने आपको जन्म दिया और पाल-पोस कर बड़ा किया, तो दूसरे ने आपको प्यार किया और जिंदगी को और खूबसूरत बनाया. सोचिए अगर कभी इन दोनों में से किसी एक की जिंदगी बचाने का सवाल उठे? तो जाहिर सी बात है कि आप गंभीर धर्मसंकट में फंस जाएंगे।

मां और गर्लफ्रेंड में से किसे चुनेंगे आप? 
इस सवाल का जवाब आसान तो नहीं है भले ही मां को बचाना बाध्याकारी न भी हो तब भी क्या आप मां की जगह अपनी गर्लफ्रेंड को बचाने का फैसला कर पाएंगे क्योंकि आप उससे बहुत प्यार करते हैं? भगवान करे कोई कभी ऐसी स्थिति में न फंसे लेकिन जरा सोचकर देखिए और सच्चे दिल से बताइए कि जिसके साथ आप जीने-मरने और पूरी जिंदगी भर का साथ निभाने का वादा करते हैं उसे बचाने के लिए अपनी मां को मौत के मुंह में अकेला छोड़ पाएंगे?

आखिर आपकी जन्मदाता और तकलीफों और मुसीबतों का सामना कर आपको बड़ा करने वाली मां ही होती है, ऐसे में जाहिर सी बात है कि आपको उसे ही बचाना चाहिए, तो फिर दो बार क्यों सोचना, मां को बचाना तो आपका कर्तव्य है!

लेकिन अगर आपको लगता है कि इस सवाल का सबसे सटीक जवाब यही है, तो जरा रुकिए जनाब!

सोचिए कैसे आप उस इंसान जिसे आप दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करते हैं और जिसके साथ पूरी उम्र चलना चाहते हैं, मरने के लिए अकेला छोड़ आएंगे? मां की ममता की कीमत इस दुनिया में कोई नहीं चुका सकता लेकिन उस इंसान का क्या जिसने पूरी दुनिया को छोड़कर आपसे बेपनाह मोहब्बत की है? तब तो आप अपनी मोहब्बत को खो देने के डर से हर हाल में अपनी गर्लफ्रेंड को ही बचाएंगे! है ना? लेकिन फिर मां की ममता का क्या होगा?

ओह, अब शायद आप इतने परेशान हो गए हैं कि इस बहस से तौबा करना चाहते हैं, खैर इस बहस में शामिल होकर मेरा भी हाल कुछ ऐसी ही है। इसलिए आप सोचिए और अगर समझ में आ जाए कोई जवाब तो जरूरत बताइएगा!

Wednesday, 30 September 2015

तीज़ और पत्निओ के साथ मार-पीट

जब तीज पर पति की लंबी उम्र और समृद्धि् की प्रार्थना की जा रही है, तो बरबस ही उन महिलाओं का ख्याल आ जा रहा है, जिनका सम्मान अपने जीवन साथी के कारण ही खतरे में है।
मान्यता है कि शि‍व की प्राप्ति‍ के लिए पर्वती ने तीज का व्रत किया था। लेकिन उन्होंने ऐसे शि‍व की कामना तो नहीं ही की होगी।
पार्वती को नहीं चाहिए ऐसे 'शिव'

Saturday, 26 September 2015

धर्मप्रेमिका

इस गतिशील रूपि जीवन के हर स्थिर क्षण में , मैं तुझे याद करता हूँ....!
तुम तीव्र गति से आती हो और शनैः से चली जाती हो....!!
इस अल्प काल के मिलन बेला में हर क्षण, हर ख्याल तुम्हारा रखता हूँ....!
मैं दिल से बात करता हूँ, तुम दिमाग से बात कर चली जाती हो....!!

Wednesday, 23 September 2015

दुर्गा पूजा की यह कैसी तैयारी ?

दुर्गा माँ की पूजा करने वाले देश में छोटी बच्ची, महिला यहाँ तक की पत्नियों से रेप क्यों ?
..
..
कुछ ही दिन मे दुर्गा माँ की पूजा अर्थात् शक्ति की आराधना होगी।
हमारे घर और समाज की दुर्गा तो शक्तिहीन है...
तो फिर किस बात की यह पूजा, उपवास रखा जाता है।
महिला आख़िर अपनी ही प्रतिमा से क्या माँगती है ....
शायद पति की लंबी आयु ,भाई की कुशलता ,परिवार की ख़ुशी...
या फिर सब कुछ ठीक हो जायेगा , कभी न कभी सबको समझ आ जायेगा, यह बात अपने मान को समझाती होगी....
एक ख़ास बात और जरूर माँगती होगी की माँ आज अगर सच्चे मन से तेरी पूजा की है तो मुझे सही-सलामत और मेरी लाज़ बचा कर इस मेले की भीड़ से सुरक्षित घर पहुँचा देना....

अब देखना यह है की इस बार दुर्गा पूजा में हमारे समाज के ठेकेदार क्या करते है?
सभ्य समाज के इस सबसे घिनौने कृत्य से छुटकारा पाने के लिए हम सब एक हों..!

रेप पीड़ित महिलाओं की असहनीय पीड़ा, घुटन और उनके दर्द भरे अनुभवों को एक गाने नें समेटा है. 'Till It Happens To You' (जब तक ये आपके साथ न हो) @ ज़रूर आप सभी सुनें...
गाना सुनने के बाद एक प्रश्न जरूर पूछें....
क्या रेप होने के बाद ही इसका दर्द समझ में आता है ?

Monday, 21 September 2015

समझदारी और ईमानदारी हर जगह होनी चाहिए..! ख़ास जगह और लोगों तक ईमानदारी दिखाने वाले पर भरोसा ना करें..!!

अमित और उसकी फैमिली परेशान थी. दरअसल
अमित की बहन नेहा कॉलेज से अब तक घर नहीं
आयी थी. रोजाना 2 बजे वह घर पर आ जाती थी,
लेकिन आज उसे बहुत देर हो गयी थी. आखिरकार
शाम को जब वह घर आयी, तो उसने बताया कि
आज कॉलोनी के एक लड़के ने उसे छेड़ा.
वह कॉलेज से उसका पीछा कर रहा था, इसलिए वह
रास्ता बदल कर आ रही थी, लेकिन वह था कि
उसके पीछे-पीछे ही आता. बीच में कम भीड़ वाली
जगह देख कर उसने रास्ता रोक लिया और हाथ
पकड़ लिया. वह हाथ छुड़ाने की कोशिश करती रही,
लेकिन छुड़ा नहीं पायी.
उसके आसपास खड़े लोग भी यह सब देख रहे थे,
लेकिन कोई मदद को नहीं आया, क्योंकि उस
लड़के के साथ उसके गुंडे जैसे दिखनेवाले दोस्त भी
थे. उस लड़के ने जबरदस्ती उसके गले में फूलों का
हार डाला और हंसी उड़ाता हुआ चला गया. नेहा
यह बोलते हुए रो पड़ी.
सिसकते हुए बोली, वहां भीड़ में खड़ा एक लड़का
मेरी मदद को आगे बढ़ रहा था, तो उसके दोस्त ने
कहा, ‘जाने दे.. तेरी बहन लगती है क्या? क्यों
फालतू पंगा ले रहा है..’
उसके यह कहते ही अमित को बीती शाम का
किस्सा याद आया. तब भी एक लड़की को कुछ
लड़के परेशान कर रहे थे और वह उम्मीद की नजर
से अमित की तरफ देख रही थी कि वह मदद करने
आयेगा, लेकिन उसने यही सोच कर वहां से
निकलना सही समझा कि ‘अपनी बहन थोड़े ही है.
जिसकी होगी, वो जाने’. अब उसे अपनी गलती का
अहसास हो रहा था.
उसने तय किया कि अब रास्ते में किसी भी लड़की
के साथ छेड़छाड़ होती देखेगी, तो वह बर्दाश्त नहीं
करेगा. वह मदद करेगा. उसने दोस्तों को भी यह
घटना बतायी और सभी ने इस बात को स्वीकार
किया कि आज अगर हम किसी की बहन की रक्षा
करते हैं, तो ही कल कोई हमारी बहन की रक्षा
करेगा.
उसने अपनी बहन को कहा कि आज तुम्हारी वजह
से मुङो समझ आया कि मैंने उस लड़की की मदद न
कर कितना बड़ा गुनाह किया. आज जिस तरह तुम
लोगों से मदद की उम्मीद कर रही थी, वैसे ही वह
भी मुझसे कर रही थी. मैं गलत था.
बात पते की..
- जब भी किसी लड़की को मुसीबत में देखें, तो यही
सोचें कि वह आपकी बहन है. यह विचार तेजी से
फैलना जरूरी है. तभी बहनें सुरक्षित रहेंगी.
- आज आप किसी की बहन को मुसीबत में छोड़
कर चले जायेंगे, तो ये उम्मीद बिल्कुल न रखें कि
कोई आपकी बहन की मदद को आगे आयेगा.

जिंदगी

1- जीवन और मृत्यु का कोई इलाज नही, इसलिए इस बीच के इंटरबेल का आनंद लिजिए
2- मौत जीवन का अतं करती हैँ, रिश्ते का नहीँ।
3- कभी-कभी जिदँगी मेँ सबसे आसान सवाल ही जवाब देने मेँ सबसे कठिन लगने लगता हैँ।
4- किसी इन्सान को जानने और समझने में बहुत फर्क होता है...
5- जब तक हम ये जान पाते हैँ कि जिदंगी क्या है तब तक ये आधी खत्म हो चुकी होती हैँ।
6- मुझे मौत का भय नही, मैँ तो बस उस वक्त वहाँ होना नही चाहता... !!

Monday, 7 September 2015

हक़ीकत 2

झूला जितना पीछे जाता है, उतना ही आगे आता है।
एकदम बराबर।
सुख और दुख दोनों ही जीवन में बराबर आते हैं।
जिंदगी का झूला पीछे जाए, तो डरो मत, वह आगे भी आएगा।
बहुत ही खूबसूरत लाईनें..
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता..!
डरिये वक़्त की मार से,
बुरा वक़्त किसीको बताकर नही आता..! 
अकल कितनी भी तेज ह़ो,
नसीब के बिना नही जीत सकती..!
बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,
कभी बादशाह नही बन सका...!!"
"ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो 
एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है! 
इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से! 
रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते है !!! "

हक़ीकत 1

बड़ी ही गहरी बात लिख दी है
किसी शक्शियत नें ...

बेजुबान पत्थर पे लदे है करोडो के गहने मंदिरो में ,
उसी देहलीज पे एक रूपये को तरसते नन्हे हाथो को देखा है।

सजाया गया था चमचमाते झालर से मस्जिद और चमकते चादर से दरगाह को,
बाहर एक फ़कीर को भूख और ठंड से तड़प के मरते देखा है ।।

लदी हुई है रेशमी चादरों से वो हरी मजार ,
पर बहार एक बूढ़ी अम्मा को ठंड से ठिठुरते देखा है। 

वो दे आया एक लाख गुरद्वारे में हाल के लिए ,
घर में उसको 500 रूपये के लिए काम वाली बाई बदलते देखा है।

सुना है चढ़ा था सलीब पे कोई दुनिया का दर्द मिटाने को,
आज चर्च में बेटे की मार से बिलखते माँ बाप को देखा है। 

जलाती रही जो अखन्ड ज्योति देसी घी की दिन रात पुजारन ,
आज उसे प्रसव में कुपोषण के कारण मौत से लड़ते देखा है ।

जिसने न दी माँ बाप को भर पेट रोटी कभी जीते जी , आज लगाते उसको भंडारे मरने के बाद देखा है ।

दे के समाज की दुहाई ब्याह दिया था जिस बेटी को जबरन बाप ने, आज पीटते उसी शौहर के हाथो सरे राह देखा है ।

मारा गया वो पंडित बेमौत सड़क दुर्घटना में यारो ,
जिसे खुदको काल सर्प, तारे और हाथ की लकीरो का माहिर लिखते देखा है। 

जिस घर की एकता की देता था जमाना कभी मिसाल दोस्तों ,
आज उसी आँगन में खिंचती दीवार को देखा है।

बंद कर दिया सांपों को सपेरे ने यह कहकर,
अब इंसान ही इंसान को डसने के काम आएगा।

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आत्महत्या कर ली गिरगिट ने सुसाइड नोट छोडकर,
अब इंसान से ज्यादा मैं रंग नहीं बदल सकता।

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गिद्ध भी कहीं चले गए लगता है 
उन्होंने देख लिया कि, इंसान हमसे अच्छा नोंचता है।

************************

कुत्ते कोमा में चले गए, ये देखकर,
क्या मस्त तलवे चाटते हुए इंसान देखा है ।

मैं क्या करूँ !

खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।
आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।
अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे।
क्यों की जीसकी जीतनी जरुरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे।
ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा भी कितना अजीब है, 
शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे हैं....!!
एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी, 
जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं,
और हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं।
बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है..

मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।

ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है

जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने
न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.
एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली..
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!

सोचा था घर बना कर बैठुंगा सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!

सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |

जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..

एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..

कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते..

लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..

"खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करता हूँ..

मालूम है कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखता हूँ...!

Monday, 31 August 2015

मर्द और बलात्कार

मर्द और बलात्कार

“मर्द कभी बलात्कार नहीं करते हैं,
माँ की कोख शर्मशार नहीं करते हैं..

मर्द होते तो लड़कियों पर नहीं टूटते,
मर्द होते तो आबरू उनकी नहीं लूटते..

मर्द हमेशा दिलों को जीतता है,
कुचलना नामर्दों की नीचता है…

बेटियां बहन मर्द के साये में पलती हैं,
मर्द की जान माँ की दुवाओं से चलती है..

मर्द नहीं फेकते तेज़ाब उनके शरीर पर,
मर्द प्रेम में मिट जाते हैं अपनी हीर पर..

मर्द उनको देह की मंडियों में नहीं बेचता,
मर्द दहेज़ के लिए उनकी खाल नहीं खेचता..

मर्द बच्चियों के नाजुक बदन से नहीं खेलते,
मर्द बेटियों को बूढों के संग नहीं धकेलते…

निर्भया-कांड के बाद क्या बलात्कार बंद हुए !!
कानून तो बदल गये पर क्या सोच भी बदल गयी !!

सोच बदलना आवश्यक हैं क्यो की सोच बदलेगी,
तो हम बदलेंगे और हम बदलेंगे तभी देश बदलेगा