तुम ही मेरी गंगोत्री, तुम ही मेरी गंगासागर !
अब तुम ही बता दो, मुझे कहाँ डुबकी लगाना है !!
लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने नज़र अंदाज़ हुए हैं तब ये अंदाज़ आया है..!
मेरी रश्के-कमर , तूने पहली नजर, जब नजर से मिलायी मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गयी , काम ही कर गयी, आग ऐसी लगायी मज़ा आ गया ||
रश्क-ए-क़मर (रस्के-कमर) = इतने खूबसूरत की चाँद भी जलता हो जिसकी खूबसूरती से
बर्क़ = बिजली गिरना
जाम में घोलकर हुस्न कि मस्तियाँ, चांदनी मुस्कुरायी मज़ा आ गया |
चाँद के साये में ऐ मेरे साक़िया, तूने ऐसी पिलायी मज़ा आ गया ||
नशा शीशे में अगड़ाई लेने लगा, बज्मे-रिंदा में सागर खनकने लगा |
मैकदे पे बरसने लगी मस्तिया, जब घटा गिर के छायी मज़ा आ गया ||
बे-हिज़ाबाना वो सामने आ गए, और जवानी जवानी से टकरा गयी ||
आँख उनकी लड़ी यूँ मेरी आँख से , देखकर ये लड़ाई मज़ा आ गया
बे-हिज़ाबाना = बिना नक़ाब या परदे के
आँख में थी हया हर मुलाकात पर , सुर्ख आरिज़ हुए वस्ल की बात पर |
उसने शरमा के मेरे सवालात पे, ऐसे गर्दन झुकाई मज़ा आ गया ||
आरिज़ = कपोल, वस्ल = मिलने
शैख़ साहिब का ईमान बिक ही गया, देखकर हुस्न-ऐ-साक़ी पिघल ही गया |
आज से पहले ये कितने मगरूर थे, लूट गयी पारसाई मज़ा आ गया ||
पारसाई = पवित्रता, छूकर किसी को सोना बना देने का वरदान ||
ऐ “फ़ना” शुक्र है आज वादे फ़ना, उस ने रख ली मेरे प्यार की आबरू |
अपने हाथों से उसने मेरी कब्र पर, चादर-ऐ-गुल ल चढ़ाई मज़ा आ गया ||
चादर-ऐ-गुल = फूलों की चादर या गुलदस्ता
अपनें #जेवर की बक्से में रख कर छुपा लो मुझे..
बाहर की दुनियाँ में बहुत खरीद बिक्री है...
कुछ वक़्त साथ रहेंगें मेरी भी #क़ीमत बढ़ जायेगी..
दहेज़ गरीबी हटाओ कार्यक्रम भी है।
दहेज़ लेनें के बाद जेंटलमैन रातो_रात अमीर हो जाता है।
एक तरफ कोई मेहनत के पसीने से रुपया गिनता है वहीं दूसरी तरफ कोई थूक लगा कर रुपया गिनता है।
जिस प्रकार तीन बार नौकरी नौकरी नौकरी कहनें से कुछ भी नही होता है। उसी प्रकार तीन बार तलाक़ तलाक़ तलाक़ कहनें से कुछ नही होता है, बस फ़र्क इतना है कि खुल्ला सांड बन जाता है।
आँखों देखी घटना है:-- मेरे ही गाँव में मुस्लिम परिवार में करीम की माई रहती है और करीम बाप को तब तक झाड़ू से झाड़ती है जबतक की झाड़ू का पूरा सिक खुल के ज़मीन पर बिखर न जाये।यह घटना घर के अंदर हो या सड़क पर दोनों जगहों पर किसी तरह का भेदभाव नही करती है झाड़ू चलाने की गति में, उसे घुमाने में, उसपर लगनें वाले बल पर किसी तरह का बदलाव पसंद नही करती है ।करीम बाप को इतनी भी हिम्मत नही है की वह सिर्फ़ तीन बार बोल दे मुझे छोड़ दो! छोड़ दो! छोड़ दो!.....
क्योंकि करीम माई का बाहुबल तथा उसका अभिव्यक्ति की आजादी का मुकाबला पुरे टोला और गाँव में करनें वाला कोई नही है।
अब मुद्दा पर आता हूँ..
जिस दिन मुस्लिम महिला, पुरुष के तुलना में ज्यादा मजबूत मानसिक तौर पर, आर्थिक तौर पर, बाहुबल के तौर पर, शिक्षा के क्षेत्र में, अभिव्यक्ति में हो जायेगी उसी दिन से जो मुल्ला अभी फरमान सुनाता है उसका दाढ़ी का एक एक बाल नोच लेगी।
तलाक़ भी देख कर दिया जाता है कि सामनें वाली महिला कितनी लाचार, वेवश, कमजोर, अशिक्षित, पारिवारिक स्थिति, आर्थिक निर्बलता से घिरी हुई है और जहां पर रहती है वहां का सामाजिक संरचना कैसा है आदि सब ध्यान में रख कर तलाक जैसे शब्द का लाभ उठाता है।
मुल्ला को पता नही होता है कि उसकी भी बेटी, बहन, पोती, भान्जी, भतीजी, माँ, नानी, दादी, काकी, चाची, मौसी,बुआ अपनी पूरी जिंदगी भर इन तीन शब्द के तले दबी रहती है और इसके लिए क्या क्या नही करना, सुनना, सहना पड़ता होगा...।
#और_अंत_में....
तलाक कुछ भी नही बस एक मात्र उच्च कोटि का शोषण का माध्यम है।
हम सब मिलकर तमाम धार्मिक, सामाजिक, परम्परागत रीतिरिवाज, रूढ़िवादी नियम या कानून को लात मार के फेंक देगें जो मनुष्य का शोषण का माध्यम हो तथा वह विकास के पथ का बाधक हो और हमारी स्वतंत्रता छिनता हो।
बाजार में एक नया शब्द चला रहा है #BP जिसका प्रयोग एवं उपयोग भोली सूरत वाले अपनें चोचला प्रकार के तर्क के आधार पर धुँआधार फायदा उठा रहा है।
मैं बात कर रहा हूँ BP यानि कि बलत्कार प्यार के आड़ में! गाँव घर की भाषा में BP को ही बलत्कारी पुरूष भी कहते हैं।
हमारे आसपास कुछ सरा हुआ महाघटिया आदमी होता है, जो महान आत्मा का रूप धारण किये रहता है और अपनें चोंच को हमेशा सी कर रखता है ताकि ऱाज बाहर ना हो सके।
फ़ेयर एंड लवली, बोरो प्लस, सुखा पॉउडर, जूता-मौजा के बिना यह अपनें घोसले से बाहर कभी निकलता भी नही है।
लड़की इसके कुतयापा पर फ़िदा हो जाती है और लड़का अपने पूर्वअनुभव के जाल में फिर से एक नई मछली को फसाता है। जिसे विश्वास के कढ़ाई में प्यार के तेल पर फ्राई कर खाता है। यहाँ तक कि शादी का वादा भी करता है और बाद में धर्म,जाति, परिवार, और पिताजी सरणम् गच्छामि! बोलता है।
मतलब बिल्कुल साफ़ है ये जो महान आत्मा हैं हमारे गली मोहल्ला घूम घूम कर गंदगी और दुर्गन्ध फैलाते रहता है और जब इसकी अपनी खुद कि शादी की बारी आये तो वर्जिन पत्नी का डिमांड रखता है या उसकी खोज करता है। यह व्यक्ति अपनी सुतयापा की सारी हदे पार करता है।
और अंत में...
इस तरह का आदमी जहाँ कहीं मिले घनघोर तरीके से विरोध करें, नही तो यह महान आत्मा जो मुखोटा पहन कर घूमता है, साधरण आदमी का उपयोग कर अपने अंजाम को अपने मंजिल तक जरूर पहुँचाता है। इसलिए सावधान रहें और तावरतोड़ विरोध करें।
मोहब्बत क्या होती है..?
यदि कृष्ण से पूछोगे तो वो दिल लगाना ही कहेगा!
गलती से मीरा से पूछोगे तो वो इंतज़ार करना ही कहेगी !!
सुकून का एक पल पानें के लिए घर से निकले..
बदले में शाम तक तन्हाई का पूरा शहर ही मिल गया।
जीना है एक दिन इसके लिए जी रहे थे।
क्या पता था मुझे यह एक दिन मौत तक पहुँचा देगी।।
कमबख्त जिंदगी भी शतरंज जैसी हो गई है
नही खेले तो द्रौपदी की तरह बिना खेले हारनें का डर।
अगर शतरंज की चाल चलो तो अपनों का खोनें का डर।।
अभी राज्यरानी एक्सप्रेस में हूँ पटना से जिला खगड़िया जा रहा हूँ..
यह ट्रेन गंगा के किनारे से शुरू होती है और ताल क्षेत्र होते हुए कोसी के आँचल तक भ्रमण कराती है। दूसरी ओर यह ट्रेन एक विकासशील क्षेत्र से पिछड़े क्षेत्र को जोड़ने का काम करती है।
सीट नही मिला है मेरी इस हालत को देख कर एक सज्जन बोले पेपर बिछा कर नीचे बैठ जाओ नही तो यह भी नही मिलेगा।
मेरे बगल वाले ने बिहार के हालात पर राजनीति पर चर्चा शुरू करते हुए भ्रष्टाचार, शराबबंदी, लालू, बाढ़ पर अपना तीन-चार तीर छोर दिया है और इसके जबावी कार्यवाही में विपक्षी ने इसके तर्क को अपने चने के भुंजा के साथ चवा गया है..
एक युवक सीट की खोज में एक बूढ़े बाबा को अपना निशाना बनाया है, बाबा अपने झोले और दोनों पैर को सीट पर रख कर यात्रा का आनंद ले रहे थे अचानक अपनी इस सत्ता को खोते देख कर बाबा बीमार हो गयें हैं.... अब बीमारू बाबा और युवक में जंग छीर चूका है अब देखते है सीट युद्ध में कौन बाजी मरता है
और अंत में..
यह महारानी ट्रेन अपनी आदत के विपरीत चाल में चल रही है पता नही कब मुझे मेरी मंजिल पर पहुचायेगी...!
चुनाव में हारे हुए अरुण जेटली भैयाजी को वित्त मंत्रालय मिलनें पर आधी आबादी को अब ज़रूर दुःख हो रहा होगा।क्योंकि इनको समझ में नही आ रहा है की #सेनिटरी_नैपकिन महिलाओं की जरूरत है ना की इनकी लगान वसूली की सामान। जिससे वे अपना तिजोरी भर सके।
अभी भी अधिकांशतः ग्रामीण महिलाएं पैसे के आभाव में तथा सुविधा और सही जानकारी के आभाव में सेनिटरी नैपकिन का इस्तमाल नही कर पाती है।वहीं अभी भी महिलाओं को इसके खरीदारी में संकोच और समस्याएं होती है।
चूँकि यह कोई लग्ज़री या विलासता की वस्तु नही है इसलिए इसे GST से बहार कर के टैक्स-फ़्री करें। और स्वच्छ, स्वस्थ्य और प्रगतिशील समाज के निर्माण में अपना योगदान दें।
और अंत में
मंत्रीजी अपना सामाजिक जिम्मेदारी समझे और उनका निर्वाह करें।ऐसे भी महिलाएं छोटी-छोटी बात नही भूलती है और अगर इनकी मन की बात पूरी नही होगी तो समझो हिसाब बराबर अगले चुनाव में..!
हमे और जीने की चाहत ना होती
अगर तुम ना होते, अगर तुम ना होते
तुम्हे देख के तो लगता हैं ऐसे
बहारों का मौसम आया हो जैसे
दिखायी ना देती, अंधेरों में ज्योती
अगर तुम ना होते..
हमे जो तुम्हारा सहारा ना मिलता
भंवर में ही रहते, किनारा ना मिलता
किनारे पे भी तो, लहर आ डूबोती
अगर तुम ना होते..
न जाने क्यो दिल से, ये आवाज़ आयी
मिलन से हैं बढ़ के, तुम्हारी जुदाई
इन आँखों के आँसू ना कहलाते मोती
अगर तुम ना होते..
गीतकार : गुलशन बावरा,
गायक : किशोर कुमार,
संगीतकार : राहुलदेव बर्मन,
चित्रपट : अगर तुम ना होते - 1983
ग़ालिब!
मैं जिस दुनियां में रहता हूँ न,
यहां भोले और सीधे लोग बहुत दिखतें हैं
मैं तो अब तेरे दर का अपराधी हो गया क्योंकि?
मेरे पास खून से सना शाकाहारी खंजर नही।
#इरोम_शर्मिला नाम तो जानतें ही होगें जिसे पूरी दुनियाँ #आयरन_लेडी के नाम से जानती है उसे मात्र 90 लोग ही उसके विधानसभा क्षेत्र में जनता है इसे ही कहते हैं राजनीति।
जो अपने जीवन के एक हिस्सा सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एएफएसपीए- अफस्पा) के खिलाफ 16 वर्ष तक भूख हड़ताल पर रहीं थी।यह वही अफस्पा कानून है जिसका जिक्र #फ़िल्म_हैदर में शाहिद कपूर ने चुस्पा शब्द से किया था। इस लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने अगस्त 2016 में अपनी भूख हड़ताल खत्म की थी। अक्टूबर, 2016 में उन्होंने पीपल्स रीसर्जेंस एंड जस्टिस एलांयस (पीआरजेए) का गठन किया और इस मार्च में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया था। परिणाम आपको पता ही क्या हुआ है...
दोस्त हार-जीत की बात नही है यह जो 90 वोट ! अभी तक गले से नीचे नही उतर रहा है और ना ही दिमाग़ मानता है ना ही समझ पा रहा है।
और अंत में
इरोम शर्मिला मानवता के हक़ की लड़ाई में आपकी हमेशा जीत होगी और यह समाज आपका हमेशा ऋणी रहेगा।
हरामख़ोरी एक कला है। जिस में व्यक्ति हरामख़ोर से हरामख़ोरी तक के सफ़र में निपुणता हासिल करता है और बाद में अपने कारनामों के अनुभव और उम्र का तकाज़ा का प्रयोग करता है।
हरामख़ोर नामक प्राणी हमारे समाज में हमारे आसपास ही रहता है।वह कभी शिक्षक, पड़ोसी, दोस्त, प्रियतम, मकान मालिक, किरायदार या संबन्धी के रूप में होता है।
भोली भाली मुरतरूपि सूरत को अपनी बातों में फसा कर उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता है। महज़ 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़नें वालो या इस उम्र के बच्चों से अगर नाम पूछा जाए तो वह बतानें के क्रम में दस बार सोचता है फिर भी हकलानें लगता है......उस पर यह हरामख़ोर अपनी नामर्दगी साबित करता है।
एक मिनट के लिए जरा सोचें यह शोषित व्यक्ति अगर हमारे घर का निकला तब क्या होगा...उसपर कितनें और किस प्रकार के प्रहार हुआ होगा.....सोच कर दिमाग़ में कंपन होनें लगता है।
इस लिए जहाँ भी यह हरामख़ोर मिले हमारा कर्तव्य और दायित्व बनता है की इस मानसिकता वालों का पुरे जोर से कठोर विरोध करें, अपनें परिवार और समाज की मासूम जिंदगी की रक्षा करें...
और अंत में...
गोरा-चिट्टा, भोली सूरत, शांत स्वभाव पर न जाए। यह कितनों-कितनों को चुपचाप का दिखावा कर अपनें जंजाल में फसाता है।
अभी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में हूँ । ऊपर वाला सीट है, ठण्ड बहुत लग रही है अपना पृष्ठीय क्षेत्रफल कम कर दिया हूँ..फिर भी कोई असर नही दिख रहा है..ओहो मैं आपको बताना भूल गया की मेरे सीट के ऊपर दो दो पंखा चल रहा है...
सामनें वाले सीट पर एक मोहतरमा हैं जो दोनों पंखे पर मालिकाना हक जमा रखी है....मैं अपना दुखभरी राग में भी दर्द सुनाता हूँ तो वो नही मानती है, बोलती तो ऐसी है जैसे सलमान खान की बहन हो " मैनें एक बार कमिटमेंट कर दी हूँ उसके बाद पंखा बंद नही होगा..."इतनें ठण्ड में आइसक्रीम भी खरीद कर खा रही है...
जो मुझे अच्छी तरह से जनता उसे पता है कि गर्मी के मौसम में भी मेरा और पंखा का कैसा रिश्ता रहता है...
और अंत में ...
हाँथ बर्फ हो गया है लिख नही पा रहा हूँ । पता नही यह क़यामत की रात किस तरह गुजारूं..😥😥😥
इस बरस की पहली बारिश और तुम्हारी यादों की बौछार के साथ मिलकर कपकपी ठंड में भी खुद को भींग जानें से नही रोक पाया ।
सौतन् हो गई नथुनी हमारी, समझा लेवे सुबह-शाम
पिया कुछ बोल न पावे, धततेरी हो गई परेशान
टूट गई सब चूड़ी हमारी, हो गई मैं बदनाम
पिया को कुछ समझ न आवे, धततेरी हो गई परेशान
लाली हमार बिंदिया, झख मारे भोर और साँझ
पिया के मन को ज़रा न भावे, धततेरी हो गई परेशान
उलझन हो गई पायल हमारी, चल न सकूँ मनयार
पिया को कुछ दिख न पावे, धततेरी हो गई परेशान
पड़ोसन हो गई गजरा हमरी, चुग़ली करे चारो ओर
पिया का मन ज़रा न बहले, धततेरी हो गई परेशान
नो-लखा हो गई झुमका हमरी, ताना मारे दिन-रात
पिया का मन ज़रा न डोले, धततेरी हो गई परेशान
हरजाई हो गई कंगन हमरी, करे लाखो सवाल
पिया का मन ज़रा न घबरावे, धततेरी हो गई परेशान
उलझन हो गई लँहगा हमरी, करे हर वक़्त परेशान
पिया का मन सोच न पावे, धततेरी हो गई परेशान
चोरनी हो गई चुनड़ी हमरी, देखे चारो ओर
पिया का मन देख न पावे, धततेरी हो गई परेशान
बासी हो गई माँगटिका हमरी, सवतीया मारे डाह
पिया का मन अब भी है परदेशिया, धततेरी हो गई परेशान
#और_अंत_में
नायक कहता है......
मुझे मनाना नही आता है !
पर वादा करते हैं कभी रूठनें नही देगें !!
[[★भारतीय नारी★]]
मेरी देहयष्टि या मुख के आकर्षण पर ना जाओ ,
यह कुछ दिन रहेगा फिर शायद ना रहे।
आकर्षित होना है तो मेरे गुणों और आदर्शों से आकर्षित रहो जो दिन प्रतिदिन निखरेंगें।
[[☆भारतीय बहन और बेटी☆]]
मुझे सभी पुरुषों में सामान्यतः भाई या पितृवत स्नेह देखने के संस्कार हैं।
आप कृपया इन संस्कारों के अनुरूप चलने के लिए , बाजार और कार्यस्थल का वातावरण निर्मित करें। और यदि मुझ से स्नेह उमड़ता भी है तो भाई सी रक्षा का दायित्व निभाएँ।
[[☆भारतीय बहु☆]]
मुझे बताया गया है मुझ पर दो परिवारों (कुल) के मान -सम्मान व रक्षा का कर्तव्य होता है।
मुझे बहकाने का प्रयास ना करें।
मुझे इनकी प्रतिष्ठा बढ़ानी है , मुझे अपने कर्तव्यों से विमुख करने के प्रयास में आपको विफलता ही मिलेगी।
[[☆भारतीय नारी दायित्व☆]]
चाहे हम माँ, बहन, बहु, बेटी या पत्नी ,जो भी हों ,
दुनिया की अन्य नारियों को
"भारतीय गरिमामय नारी " चरित्र की प्रेरणा देना अपना कर्तव्य मानतीं हैं।
इस देश की नारी जो किन्हीं प्रलोभनों या भ्रमित कर दिए जाने के कारण यह गरिमा खो रही हैं ,
उन्हें सही दिशा और गरिमा वापिस दिलाना चाहती हैं।
भारतीय पुरुष को भी नारी को आदर से रखने और उसके रक्षक होने के संस्कार होते हैं।
आप कृपया इसका पालन कर वह वातावरण हमें उपलब्ध करायें ताकि हम अपने कर्तव्यपरायणता में सफल हो समाज और भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व को सुखी बना सकें ||
,,,,,, मोनिका सूद ,,,,,,
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा !
अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मुहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा !!
मैं जी गलत काम करनें वालों को पार्टी में नही रखता हूँ जी....सिर्फ़ अच्छे व्यक्ति को ही पार्टी का टिकट देता हूँ जी। अब आप लोग को पता चल गया कि मैं ईमानदार हूँ जी।:--- #केजरीवाल (मुख्यमंत्री)
सच्चा प्यार तो सात फ़ेरे लेनें के बाद भी नही होता है जी, वो अलग बात है कि घर से निकलनें के पहले पति जब पत्नि का पैर छुता है तो प्यार का आभास होता है परन्तु शुरुआत कहीं और होता है:---#संदीप_कुमार(महिला और बाल विकास मंत्री )
अब ग़ालिब तुम ही बता दो, कोई अच्छा है तो,कैसे अच्छा है और क्यों अच्छा है?
प्रश्न का उत्तर खोजते खोजते थक गया हूँ क्योंकि
ग़ालिब तेरे शहर में,मैं भी अच्छा कहलवाना चाहता हूँ।
प्रिय मित्रों
हरिस्मरण !
आज सुबह सुबह उठते ही जब जुकरबर्ग भाई के fb को हाथ लगाया उधर से #साक्षी_मलिक बहिन सभी भारतीय निठल्ले गबरू भाई को अपने कांस्य पदक से ही राखी बाँध रही थी उसमें भी पहलवानी वाला।हम भी गर्व से अपना छाती फुला कर हाथ आगे कर दिये की आज से मेरी रक्षा की जिम्मेदारी बहन तुम्हारी हुई।
मन ही मन याद कर रहा था की एक जमाना था जब घर में लुड्डो भी खेलनें देना दूर के बात छूनें भी नही देते थे। बहुत मुस्किल से जब खिलाड़ी घट जाता तब एक, दो चान्स मिलता था... छु-ती-ती-ती, चोर-सिपाही, क्रोस- ज़ीरो, कैरम बोर्ड... यदि सब वाला खेल में मौका मिलता था उसमें भी घर के अंदर ही।
गलती से भी किसी कुत्ते पर भी पत्थर उठा कर नही फेकी होगी।कभी भी गुस्से से गिलास भी उठा कर नही पटकी होगी। हाँ अगर गुस्सा ज्यादा आने पर देर तक खाना बनाने के साथ एक दो रोटी जरूर ज्यादा बना देती थी।
अपने परवरिस के विपरीत आज तूनें पुरे दुनियाँ के सामने जो पहलवानी की है, जिस तरह से उठक-पटक कर चीत कर सारे देशवासियों को #रियो ओलंपिक में पहला पदक के साथ हमारी चहरे पर जो मुस्कान दी है, उसमें भी #रक्षाबन्धन के दिन अपने आप पर गर्व कर रहा हूँ। साथ ही अपने किये पर पश्चयताप भी हो रहा है और लज्जा भी आ रही है।
आज हम सब संकल्प लेता हूँ की तुम्हारी स्वतंत्रता, आज़ादी, पसंद, नापसंद, तुम्हारी हर इच्छा को सर्वोपरि स्थान दूँगा। तुम्हारी विकसपथ पर कभी भी धर्म, समाज का रीति रिवाज, प्रथा का आँच नही आनें दूँगा।
जो गलतियाँ हो गई तो हो गई अब अपने बराबर तुझको भी अधिकार दूँगा ही नही बल्कि किसी तरह का अंतर या भेदभाव नही करूँगा।
और अंत
हम सभी देशवासी #दीपा_कर्मकार, #सानिया, #साइना, #सिंधु, ....सभी पर हमेशा ही गर्व करता हूँ और करता ही रहूँगा। हार जीत खेल और जीवन का क्षणिक हिस्सा होता है। आप सभी पहले से ही इस देश की डायमंड, प्लेटिनीयम हैं...... स्वर्ण, रजत, कांस्य का पदक लेनें की हम सब की भी कोई तमन्ना नही है, बस हम सब के लिए आप देश का नेतृत्व करतें रहें यही हमारे लिए सोभाग्य की बात है।
..
आप सभी को साथ ही मित्रों को
#__रक्षाबन्धन_की_बधाई_और_शुभकामनाएं!
अभी दानापुर भागलपुर इंटरसिटी से भागलपुर जाने वाला हूँ..मेरे साथ नाम तो सुना ही होगा #राज ! राज है, पूरी तरह सज धज के...सुगंधित इत्र के साथ तैयार होकर... मुझे बोला है चलनें के लिये। मैं भी #मैगी की तरह 2 मिनट में तैयार हो गया हूँ....लग रहा ट्रेन छूट जायेगा,
हनुमान मन्दिर पहुँच गया हूँ, पूरी तरह सावन के सोमवारी में भक्त डूबा हुआ है और मैं डाक बम की तरह दौर रहा हूँ, राज पीछे हफ्ते हफ्ते आ रहा है, ट्रेन को धर के पकर लियें हैं..ई का महाराज सिलिपर डिब्बा इंटरसिटी में ...राज भी क्या कम लगता है खिड़की से हाथ घुसिया के रुमाल फ़ेक कर दो सिट का रिजर्ववेसन करा लिया है।छाती चौड़ा कर के बैठते ही एक महिला आ गई है। राजबा को बोलें महिला है अपना सीट देदो.. ई हँसते हुए मुझे देखा, और अपना दाँत दिखाते हुए बोला तुम अपना सीट देदो, और कान में तेल डाल कर सो गया है...अपना सीट महिला को देते हुए पूछा आगे कहाँ तक जाना है? वो बोली बिहार सरीफ, हरनौत जा रहें हैं पिताजी का तबीयत ख़राब है अंतिम समय है मिलनें जा रहें हैं !
एक व्यक्ति मेरे बगल में खड़ा है और अपना हाथ झोला पर से नही हटा रहा है दूसरा व्यक्ति बोला ई झलबा का जान छोड़ दो या मथबा पर् ले लो...उधर से तीव्र गति से रिस्पॉन्स मिला चोरी हो जायेगा तो क्या तू अपना घरबा से लाकर देबेे की..फिर क्या होना है दोनों के बीच संस्कृत का पाठ शुरू हो गया है....
मुझे तो यही लग रहा है इस ट्रेन मे चोरी होना आमबात है क्योंकि राज भी अपना झोला को लात में फसा कर सीट के नीचे रख लिया है।
झालमुड़ही वाला भी आ गया है उसकी आवाज़ सुनते ही एक सज्जन बोलें..कितनों भीड़ रहेगा ई चढ़ जेयवे करेगा और लगता है दूसरे के मथबे पर रख कर बेचेगा...
ट्रेन रुकते ही बोल बम! बोल बम सुनाई देनें लगा है शायद सुल्तानगंज जाने वालें बम हैं.... "बोल बम बोल कर !ट्रेन के भीड़ को चीर कर!!" बोलते अन्दर आ रहा है, एक बम बोला ...पूरा ट्रेन ख़ालिये है,आबेने रे तोरा जगह दिलबो हिये$$.....इसे ही कहते हैं भोले भंडारी की शक्ति, सब मुस्किल को चुटकी में हल कर देतें हैं।
अब भागलपुर पहुँच कर बातचीत होगी...
और फ़िलहाल राज बाबू गर्दन को खिड़की के रड पर रख कर सो रहा है और बीच-बीच में आधा आँख खोल कर बोलता है...नींद आ रहा है!
अभी मगध एक्सप्रेस में हूँ , टिकट आधा ही कन्फ़र्म हुआ है और उस पर तीन गोटा कोच काच के बैठ गयें हैं।सामने वाले सीट पर दो बच्चे अपनी माँ के कभी गोद में कभी कंधे पर चढ़ के चौंउ चौंउ कर अपने निश्छल प्रेम से लोट पोट हो रहा है, बच्चों की भाषा को सिर्फ़ माँ ही समझ रही हो, और माँ की भावनाओं को सिर्फ़ वो, बीच में और किसी को कोई जगह न हो।
सामने एक महान आत्मा है जो बिना मुँछ के बार बार ताऊ देते जा रहा है, लगता है जवान का नया नया शादी हुआ है, अभी पानी वाला आया है आते ही जवान ने उसको रगड़ दिया है, पानी के एक बोतल लेकर बोला यह बोतल क्यों बेच रहा है जब तक रेल नीर का बोतल लाकर नही देगा ई बोतल न देगें, जाओ सिर्फ रेल नीर का बोतल लाओ, हॉकर बोला मालिक हमको यही मिलबे करता है हमार बोतल दे दीजिय, जायदा करियेगा तो ए गो ला कर दे देगें, इ बतबा सुनते ही जवान को ताऊ आ गया बोला तुम लोग भारत के रेल बेच कर खा गए हो जल्दी रेल नीर लाओ नही तो नौकरी से हटवा देगें... और फिर क्या था जवान पुरे कंपाट में रेलवे के माई बहिन पर् भाषण देना शुरू कर दिया है पाँच आदमी हाँ में हाँ मिला रहा है..
इ जवान को पता नही है कि जो रेल में पानी बेचता है वह गरीब घर से होता है इस लिए वो ट्रेन में पानी बेच रहा है, ट्रेन से हटेगा तो दूसरे जगह पानी बेचेगा,... तुम्हारे ऐसे हरामी लोग जो पेंट्रीकार के ठीकेदार को कुछ नही बोलेगा लेकिन गरीब गुरवन को गर्दन ज़रूर तोड़ेगा.. गलती से कहीं वो अपने बाल बचबन को पढ़ा रहा होगा न तो... तुमको जरूर पानी पिला देगा..
मेरे सीट के कोणा कोणी में एक युवक अपने मोबाईल पर लगातार अँगुली फेर रहा है और बीच-बीच में अपना मुँह बिचका रहा है.. जब हम भी गर्दन टेड़ा कर के देखें तो एक लड़की का फ़ोटो को ज़ूम कर कर के देखे जा रहा है ...
Pslv से तेज रफ़्तार से खाना देने वाला आ रहा है रुकते ही सनी देवल के स्टाइल में बोला डवल अंडा बिरयानी, रायता, आचार,पानी ,प्लेट और चम्मच खाना में है...जो पूछ रहा था वह अभी तक कन्फ्यूजयाल है क्या बोला गया है...
ट्रैन का ख़टर ख़टर जब धीरे होता है तब खिड़की के बाहर से बेंगवा का टर् टर् तेज हो जाता है...देखिये अब कौन तेज बोल कर जीतता है... पूरी रात बाँकी है...
पैर में दर्द अब होने लगा है थोड़ा झार झुर के सीधा कर लेतें हैं ।
और अंत में..
भूख भी लग गया है कुछ इंतज़ाम करता हूँ इस पेट महाराज का।