लोग कहते हैं कि तुम्हारा अंदाज़ बदला बदला सा हो गया है पर कितने ज़ख्म खाए हैं इस दिल पर तब ये अंदाज़ आया है..! A6
Wednesday, 1 March 2023
ऐ bpa वालों तुम्हें कुछ मालूम भी है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 26 February 2023
कुछ तो है जो छूट रहा है #BPA
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 18 February 2023
लगता है नाराज़ होकर पहुंच गई है भोलेनगरी में
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 17 February 2023
सुझाव
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 14 February 2023
स्नेह दिवस की पगली को भी शुभकामनाएं
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 12 February 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 7 February 2023
Happy 🌹Rose🌹 Day
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 6 February 2023
कंधे में दर्द बहुत है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 5 February 2023
बजट
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 3 February 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 1 February 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 29 January 2023
चाय
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 27 January 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 26 January 2023
इस कमजोर विद्यार्थी को भी..
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 23 January 2023
मर्द
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 22 January 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 20 January 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 11 January 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 6 January 2023
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 31 December 2022
आख़री खत
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 30 December 2022
जब उसने मेरी तरफ देखी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 14 December 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 11 December 2022
गोरी है कम ..... आँखों में काजल है ज्यादा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 9 December 2022
वो और भी खूबसूरत होते जा रही ...
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 6 November 2022
379 कहानी की अगली कड़ी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
379 कहानी की अगली कड़ी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 5 November 2022
वे असल मे कब मुस्कुराते है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 28 October 2022
मेरे कमरे में
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 25 October 2022
वो दीपावली की अगली सुबह की तरह है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद.....तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 24 October 2022
एक दीया मैंने भी जलाई है..मोतिहारी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 17 October 2022
मेरी दवा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 16 October 2022
समझदारी v/s मोहब्बत
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 8 October 2022
घर वापसी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 7 October 2022
वो लड़की याद आती है....
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
मैं अपने ज़िन्दगी का
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 5 October 2022
भीड़ का नया कारण/प्रकार भी..
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 4 October 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 3 October 2022
कर्तव्य और जिम्मेदारी के बीच सब्र और इंतज़ार
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 1 October 2022
ज़िन्दगी और कुछ भी नही, तेरी मेरी कहानी है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 14 September 2022
अंग्रेजी को भी हिंदी दिवस की शुभकामनाएं
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 27 August 2022
ख़्वाब
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 11 August 2022
दोस्त
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 31 July 2022
क्या इश्क से बचकर भागनें वाले बेवफ़ा नही होता
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
पूरे सावन भी पतझड़ लगता है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 30 July 2022
जब से दिल में दर्द तेज हुआ है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 29 July 2022
BPA ड्राइविंग उस्ताद के द्वारा ज़िन्दगी जीने का सीख
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
जो मेरे दिल मे बसती है उसकी बस्ती
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 28 July 2022
हाँ मीरा मैं भी हूँ तुम्हारी तरह
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 27 July 2022
दुनियाँ में 3 ही तरह के रिश्ते/लोग अपनें होते हैं
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 22 July 2022
वो कहती है,धीरे चलते हो
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 16 July 2022
बुलाती है तेरी बाँहों का सहारा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 14 July 2022
जो मैं हूँ.....जो मैं नही हूँ
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
शिव ही नही सावित्री भी पूजा जाए
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 12 July 2022
ये काली रात ज़रा...आहिस्ते से गुजरना..
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 9 July 2022
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 5 July 2022
नमस्ते यशपाल, सप्रेम हरिस्मरण !
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
छोटी बहन को खुला पत्र
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 2 July 2022
सीने में एक पगली सी लड़की रहती है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 30 June 2022
धर्मप्रेमिका के साथ नही से हाँ तक का सफ़र
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Saturday, 25 June 2022
12 बरस का वनवास
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 24 June 2022
बर्तन धोने की इच्छा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 22 June 2022
ज़िन्दगी के रिश्तों में लड़की का होना आवश्यक है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 19 June 2022
तुम्हें तो खुद से भी प्यार करना है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
मेरे पिताजी बस इतना ही कहते हैं..
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 17 June 2022
सफलता और असफलता
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 15 June 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
धर्मप्रेमिका
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
जुल्फों का छांव
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 14 June 2022
तुमसे मिलकर ना जाने क्यों...
गायक: Lata Mangeshkar, Shabbir Kumar
संगीतकार: लक्समिकान्त प्यारेलाल
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 13 June 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
युद्ध और प्रेम
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 12 June 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 9 June 2022
प्यार और अधिकार
शादी तो सब करता है पर बराबर का अधिकार कोई नही देता है..!!
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 1 June 2022
मैं कानूनों का जानकार भी हूँ
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 30 May 2022
गिरा हुआ पानी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 29 May 2022
मैं ही बिहार पुलिस अकादमी हूँ
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 26 May 2022
मोहब्बत और कानून
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
मेरा इश्क भी शाकाहारी है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 24 May 2022
एक बात तुम से कहनी है
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 22 May 2022
लड़कियां ब्याही जाती हैं
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
रोटी
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 17 May 2022
दहेज़
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 16 May 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
धर्मप्रेमिका
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
विरह
नही तो, बगल में साथ चलते हुए भी #शरीर_नज़र आती है..!!"
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 11 May 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 10 May 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 4 May 2022
अब तो स्वीकार कर लो दोस्त
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 3 May 2022
BPA,घर और घड़ी शौतन कि
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 2 May 2022
धर्मप्रेमिका
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 28 April 2022
धर्मप्रेमिका
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Wednesday, 6 April 2022
दिल के अरमा आंसुओं में बह गए
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 1 April 2022
यादों की गलियों से..!
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 27 February 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 14 February 2022
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 9 November 2021
छठ पूजा पर विशेष
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 6 June 2021
ये दुनिया अगर मिल भी - Ye Duniya Agar Mil Bhi
Movie/Album: प्यासा (1957)
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: मो.रफ़ी
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 20 November 2020
धर्मप्रेमिका
जो प्रेम गली में आया ही नहीं
प्रीतम का ठिकाना क्या जाने…
जिसने कभी प्रीत लगाई नहीं
वो प्रीत निभाना क्या जाने…..
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Thursday, 2 January 2020
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया…
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिस काम का बोझा सर पे हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिस इश्क़ का चर्चा घर पे हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो मटर सरीखा हल्का हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना दूर तहलका हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना जान रगड़ती हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना बात बिगड़ती हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें साला दिल रो जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो आसानी से हो जाए…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो मज़ा नहीं दे व्हिस्की का
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना मौक़ा सिसकी का…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसकी ना शक्ल इबादत हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसकी दरकार इजाज़त हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो कहे ‘घूम और ठग ले बे’
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो कहे ‘चूम और भग ले बे’…
वो काम भला क्या काम हुआ
कि मज़दूरी का धोखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मजबूरी का मौक़ा हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ठसक सिकंदर की
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना ठरक हो अंदर की…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो कड़वी घूंट सरीखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें सब कुछ ही मीठा हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो लब की मुस्कां खोता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो सबकी सुन के होता हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो ‘वातानुकूलित’ हो बस
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ‘हांफ के कर दे चित’ बस…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ढेर पसीना हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ना भीगा ना झीना हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना लहू महकता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो इक चुम्बन में थकता हो…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें अमरीका बाप बने
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो वियतनाम का शाप बने…
वो काम भला क्या काम हुआ
जो बिन लादेन को भा जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो चबा…’मुशर्रफ’ खा जाए…
वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें संसद की रंगरलियां
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो रंगे गोधरा की गलियां…
2
अरे, जाना कहां है…?
उस घर से हमको चिढ़ थी जिस घर
हरदम हमें आराम मिला…
उस राह से हमको घिन थी जिस पर
हरदम हमें सलाम मिला…
उस भरे मदरसे से थक बैठे
हरदम जहां इनाम मिला…
उस दुकां पे जाना भूल गए
जिस पे सामां बिन दाम मिला…
हम नहीं हाथ को मिला सके
जब मुस्काता शैतान मिला…
और खुलेआम यूं झूम उठे
जब पहला वो इन्सान मिला…
फिर आज तलक ना समझ सके
कि क्योंकर आखिर उसी रोज़
वो शहर छोड़ के जाने का
हम को रूखा ऐलान मिला…
लेखक :-पीयूष मिश्रा
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
हम देखेंगे
हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो लोह-ए-अज़ल[1] में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां [2]
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महक़ूमों के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हक़म के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम [3]
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ायब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर[4] भी
उट्ठेगा अन-अल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
लेखक:- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शब्दार्थ
ऊपर जायें↑ 1 सनातन पन्ना
ऊपर जायें↑ 2 घने पहाड़
ऊपर जायें↑ 3 पवित्रता या ईश्वर से वियोग
ऊपर जायें↑ 4 देखने वाला
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे
जो इश्क़ को काम समझते थे
या काम से आशिक़ी करते थे
हम जीते-जी मसरूफ़ रहे
कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
काम इश्क़ के आड़े आता रहा
और इश्क़ से काम उलझता रहा
फिर आख़िर तंग आ कर हम ने
दोनों को अधूरा छोड़ दिया
लेखक :- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 22 November 2019
आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में,
आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में,
जनता है चिंता की मारी मेरे गाँव में।
आने वाले हे शिकारी मेरे गाँव में,
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।
फिर वही चोराहे होंगे
प्यासी आखों उठाए होंगे
सपनो भोगी रातें होंगी
मीठी-मीठी बातें होंगी
मालाएं पहनानी होंगी
फिर ताली बजवानी होंगी
दिन को रात कहा जायेगा
दो को सात कहा जायेगा
आने वाले हें- आने वाले हें मदारी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।
शब्दों-शब्दों आहें होंगी
लेकिन नकली बाहें होंगी
तुम कहते हो नेता होंगे
लेकिन वे अभिनेता होंगे
बाहर-बाहर सज्जन होंगे
भीतर-भीतर रहजन होंगे
सब कुछ हे,फिर भी मांगेगे
झुकने की सीमा लाघेगें
आने वाले हें भिखारी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।
उनकी चिंता जग से न्यारी
कुर्सी हे दुनिया से प्यारी
कुर्सी हे तो भी खल्कामी
बिन कुर्सी के भी दुस्कामी
कुर्सी रास्ता कुर्सी मंदिर
कुर्सी नदियां कुर्सी शाहिल
कुर्सी पर ईमान लुटायें
सब कुछ अपना दावं लगायें
आने वाले हैं- आने वाले हैं जुआरी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।
#वरिष्ठ_गीतकार_श्री_राजेंद्र_राजन_जी_की_प्रस्तुति ।
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Sunday, 1 September 2019
गाना / Title: जिहाल-ए-मस्ती, मकुन-ब-रन्जिश - jihaal-e-mastii, makun-b-ranjish
चित्रपट / Film: Gulaami 1985
गीतकार / Lyricist: गुलजार-(Gulzar)
गायक / Singer(s): लता मंगेशकर-Lata Mangeshkar - Shabbir Kumar
जिहाल-ए-मस्ती मकुन-ब-रन्जिश,
बहाल-ए-हिज्र बेचारा दिल है
सुनाई देती है जिसकी धड़कन
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है
वो आके पहलू में ऐसे बैठे
के शाम रंगीन हो गई है (३)
ज़रा ज़रा सी खिली तबीयत
ज़रा सी ग़मगीन हो गई है
(कभी कभी शाम ऐसे ढलती है
के जैसे घूँघट उतर रहा है ) - २
तुम्हारे सीने से उठ था धुआँ
हमारे दिल से गुज़ार रहा है
ये शर्म है या हया है क्या है
नजर उठाते ही झुक गयी है
तुम्हारी पलकों से गिरके शबनम
हमारी आँखों में रुक गयी है
खुसरो का वह गीत जिससे गुलज़ार को प्रेरणा मिली थी।
अमीर खुसरो ने एक गीत (तकनीकी तौर पर इसे क्या कहेंगे मैं नहीं बता सकता) लिखा जिसकी खासियत यह थी कि इसकी पहली पंक्ति फ़ारसी में थी जबकि दूसरी पंक्ति ब्रज भाषा में। फ़िल्म के गीत की तर्ज पर ही खुसरो के इस गीत को भी पढ़ें। गजब के शब्द.. कमाल की शब्दों की जादूगरी।
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, (फ़ारसी)
दुराये नैना बनाये बतियां | (ब्रज)
कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, (फ़ारसी)
न लेहो काहे लगाये छतियां || (ब्रज)
शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़
वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह, (फ़ारसी)
सखि पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां || (ब्रज)
यकायक अज़ दिल, दो चश्म-ए-जादू
ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं, (फ़ारसी)
किसे पडी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियां || (ब्रज)
चो शमा सोज़ान, चो ज़र्रा हैरान
हमेशा गिरयान, बे इश्क आं मेह | (फ़ारसी)
न नींद नैना, ना अंग चैना
ना आप आवें, न भेजें पतियां || (ब्रज)
बहक्क-ए-रोज़े, विसाल-ए-दिलबर
कि दाद मारा, गरीब खुसरौ | (फ़ारसी)
सपेट मन के, वराये राखूं
जो जाये पांव, पिया के खटियां || (ब्रज)
चाहें अमीर खुसरो हों जिनके सूफ़ी गीत आज भी उनके चाहने वालों की पहली पसंद हैं और चाहें गुलज़ार जो पिछले पाँच से छह दशकों से एक के बाद एक नायाब गीत हमें दे रहे हैं.. दोनों का ही अपने क्षेत्र में कोई मुकाबला नहीं।
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Friday, 9 November 2018
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
छीनकर सर्वस्व मेरा तब कहा तुमने भिखारी,
आँसुओं से रात दिन मैंने चरण धोये तुम्हारे,
पर न भीगी एक क्षण भी चिर निठुर चितवन तुम्हारी,
जब तरस कर आज पूजा-भावना ही मर चुकी है,
तुम चलीं मुझको दिखाने भावमय संसार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
व्यर्थ है फिर देवता भी, व्यर्थ फिर मन का समर्पण,
सत्य तो यह है कि जग में पूज्य केवल भावना ही,
देवता तो भावना की तृप्ति का बस एक साधन,
तृप्ति का वरदान दोनों के परे जो-वह समय है,
जब समय ही वह न तो फिर व्यर्थ सब आधार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
हैं गये भर से थे जो हृदय में घाव तुमने,
कल्पना में अब परी बनकर उतर पाती नहीं तुम,
पास जो थे हैं स्वयं तुमने मिटाये चिह्न अपने,
दग्ध मन में जब तुम्हारी याद ही बाक़ी न कोई,
फिर कहाँ से मैं करूँ आरम्भ यह व्यापार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
थी पड़ी जब नाव अपनी काल तूफ़ानी भँवर में,
कूल पर तब हो खड़ीं तुम व्यंग मुझ पर कर रही थीं,
पा सका था पार मैं खुद डूबकर सागर-लहर में,
हर लहर ही आज जब लगने लगी है पार मुझको,
तुम चलीं देने मुझे तब एक जड़ पतवार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Tuesday, 20 February 2018
जय राज संग स्नेहा भारती
तेरे हर घर द्वार को आज मैं,आठो धाम लिखता हूँ
मिलन के इस अर्द्ध रात को आज अपने जीवन का सवेरा लिखता हूँ
अपनी सारी चल अचल साँसे तेरे नाम लिखता हूँ
गंगोत्री से गंगासागर तक खुद को समर्पित कर तेरे नाम लिखता हूँ
तेरी हर खुशी को अपनी खुशी मानूंगा ऐ बात सर झुका कर लिखता हूँ
तेरी माथे की बिंदिया को अपने जीवन का उगता हुआ सूरज लिखता हूँ
तेरी पाँव के रुनझुन को अपने जीवन का धुन लिखता हूँ
अपनी धड़कन का नाम भी, आज से तेरा ही नाम रख दिया हूँ यह बात भी लिखता हूँ
मैं राम तो नही फिर भी सीता समझ कर तुम्हें स्वीकार करता हूँ
सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए ....
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं...!!
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”
Monday, 5 February 2018
पैडमैन
तमिलनाडु के अरणाचलम मुरगनाथम की बायोपिक #पैडमैन के रिलीज होनें के बाद भी शायद स्थिति कमोबेश वही रहेगी...
इस फ़िल्म को लेकर मुझे कोई ज्यादा उम्मीद नही है क्योंकि रील लाइफ और रियल लाइफ में अंतर होता है।
समस्या पहले भी और आगे भी रहेगी क्योंकि प्रश्न वही पुराना है??
ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी पैड का इस्तेमाल क्यों नही करती है ? शायद नही बल्कि यही उत्तर है
1. ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी पैड खरीदने में सक्षम नही है..अधिकांशतः कपड़ों का उपयोग करती है
2. उन तक सेनिटरी पैड की पहुँच नही है
3. उन्हें यह मालूम है या नही की सेनिटरी नैपकिन किस बला का नाम है,आखिर होता क्या है
4. नैपकिन की खरीदारी और उपयोग में संकोच एवं शर्म आना
5. मूलतः गाँव मे सेनिटरी पैड सहज व सुलभ नही है
6. पुरुषों से ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी नैपकिन माँग ही नही सकती है।
7. शहरों में आज भी दुकानदार पैड को काली पॉलीथिन में देते हैं तो ग्रामीण स्तर की हालत और भी खराब है।
#सुझाव
1. खरीदनें में आसानी हो इसके लिए सेनिटरी नैपकिन/पैड का नाम बदल कर # सहेली कर दिया जाए..
2. महिला स्वंय सहायता समूह और आशा के मदद से ग्रामीण स्तर पर इसका निर्माण किया जाए ताकि उपयोग में सहजता एवं लागत और खरीदने में आसानी हो
3. ग्रामीण स्कूल में बालिकाओं के लिए निःशुल्क सहेली (पैड) का वितरण
4. महिला के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे पर ग्रामीण स्तर पर चौपाल का आयोजन जिसमें महिला भी शामिल हो
#सहेली(पैड) के निर्माण कंपनी के लिए दिशा निर्देश
1. महिला द्वारा सहेली के उपयोग के बाद उसे फेंकने का उचित प्रबंधन किया जाए ताकि सफाईकर्मी (कूड़ावाला) उस से दूरी नही बनायें। सुझाव के तोर पर सहेली के निर्माण कंपनी को प्रति सहेली(पैड) फेंकने के लिए अलग रैपर या पैकेट की व्यवस्था, सहेली के खरीदारी के साथ ही दिया जाए ताकि महिलाओं को फेकने में दिक्कत ना हो।
2. सहेली के tv पर प्रचार-प्रसार करते वक्त नीली स्याही का प्रयोग करता है। उसके बदले लाल स्याही का प्रयोग करे ताकि लोगों को इसकी सच्चाई पता चले और इसको लेकर समझदारी बढ़े।
#सरकार से आग्रह
1. सभी स्कूलों, कॉलेज, स्टेशन, बस स्टॉप और सरकारी भवन में सहेली-बॉक्स लगाया जाए ताकि महिला निःशुल्क वहाँ से सहेली प्राप्त कर सके
2. सहेली पर किसी तरह का कर (GST) नही लगाया जाए
3. महिलाओं को महीनें में 2 दिन विशेषावकाश(प्रकृति अवकाश) सभी सरकारी, गैर सरकारी, संगठित और गैर संगठित क्षेत्र में लागू किया जाए वो भी बिना पूर्व आवेदन के।
और अंत में
जो लिख रहा हूँ उसका संबंध मातृत्व की पहचान से है, सृष्टि सृजन करता का अस्तित्व की निशानी से है!!
“ऐसा क्या लिखू की तेरे दिल को तस्सली हो जाये,
क्या इतना कहना काफीं नहीं है कि मेरी जिंदगी हो तुम..!!”