Saturday, 22 April 2023

मैं रावण हूँ.......मुझे राम से ईर्ष्या होती है

मैं रावण हूँ 
मुझे राम से ईर्ष्या होती है

मैं पाताल लोक का वाशी हूँ
वो धरती और आकाश का मालिक है

मेरे पास सब कुछ है
वो सब कुछ का मालिक है

मैं सत्य के पीछे भागता हूँ
वो ही केवल अंतिम सत्य है

मेरे पास सारी शक्तियां है
वो सभी शक्तियां का स्रोत है

मेरे सभी देवी देवता दासी है
वो सभी दासी का स्वामी है

मैं त्रिलोक विजेता हूँ
वो त्रिलोक रचेयता है

मैं लंका का राजा हूँ
वो ब्रह्मांड का जननी है

मैं लंकापति  रावण हूँ
वो तो तीनो लोक का नारायण है

Sunday, 2 April 2023

पुराने शहर के परिन्दें बहुत याद आते हैं

अब नए शहर में किसी को अपना नही बनाऊंगा
पुराने शहर के परिन्दें बहुत याद आते हैं

अब नए शहर में किसी को धोखा नही दूँगा
पुराने शहर के बफादारी बहुत याद आते हैं

अब नए शहर में किसी से वादा नही करूँगा
पुराने शहर के कसमें बहुत रुलाते हैं

अब नए शहर में किसी को अच्छा नही कहूँगा
पुराने शहर के लोगों की याद रात भर जगाते हैं

अब नए शहर में किसी को अच्छा नही कहूँगा
पुराने शहर के ईमानदारी बहुत खलता है

अब नए शहर में किसी को खरीद कर कुछ नही दूँगा
पुराने शहर के आँखों के काजल बहुत रुलाता है

अब नए शहर में किसी को आवाज देकर नही रोकूँगा
पुराने शहर के पायल की रुनझुन बहुत सताता है

और अंत में

आज रविवार है पगली फिर से छोटी सी बिंदी 
और आँखों हल्का काजल लगायी होगी

Saturday, 18 March 2023

नये शहर में अगर मैं खो जाऊँगा

नये शहर में अगर मैं खो जाऊँगा
तुम आवाज़ देना, वापस आ जाऊँगा

नये शहर में अगर मैं व्यस्त ज्यादा हो जाऊँगा
तुम याद आना, फुर्सत मैं ढूंढ लाऊँगा

नये शहर में रातभर नींद नही आती है
तुम सपनों में आना, सारी रात पुरानी बातें करूँगा

और अंत में

नये शहर में जिसे देखूँ बातें सुना जाता है
पुराने शहर की तुम्हारी डाँट बहुत याद आती है

जाते जाते

कल रविवार है पिछली रविवार की तरह सजना संवरना 
आँखों में हल्का काजल, माथे पर छोटी सी बिंदी लगाना
बालों को सजा कर बांधना, और होठों पर थोड़ी मुस्कुराहट रखना

और मैं तुम्हें दूर से ही नज़रे झुकाये देखता रहूँगा

Thursday, 9 March 2023

होली की शुभकामनाएं

Tuesday, 7 March 2023

Bpa छोड़ते छोड़ते

Bpa छोड़ते छोड़ते 
मैंने तुम्हें भी छोड़ दिया 
तेरी बातें को 
तेरी मुस्कुराहट को
तेरी यादों को
तेरी ख़्वाब को
तेरी चेहरे को
तेरी अहसासों को
तेरी भरोसे को
तेरी इसरों को
तेरी पायल को
तेरी अदाएं को

*अरे पगली सुन*
तू तो कुछ पूछती भी नही है फिर भी कहता हूँ..

सब कुछ छोड़ते छोड़ते
मैंने खुद को भी तेरे पास छोड़ दिया
अगर तू इजाजत दे तो
सिर्फ शरीर ले जा रहा हूँ
साँसे चल रही है.. नाम तेरा ले रहा
धड़कन धड़क रही है..पर तेरे लिए
आगे कुछ दिख नही रहा..बस तू दिखती है
आँखे पत्थर सी हो गई है..सिर्फ़ तुझे  ढूंढ रही है
कहाँ हूँ पता नही..सिर्फ लगता है तेरे हाथ मेरे हाथ मे है
तेरी सारी बातें अंदर ही अंदर मुझे कचोटती है

Wednesday, 1 March 2023

ऐ bpa वालों तुम्हें कुछ मालूम भी है



ऐ bpa वालों तुम्हें कुछ मालूम भी है 
या यूँ ही खुद पर गुमान करते हो..
तेरी छोटी सी चार दिवारी में
मेरी खूबसूरत महबूब भी रहती है

जब शाम को सजधज कर मुझसे मिलती है तो
तेरी ऊँची गुबंद वाली मकान भी फीकी लगती है

जब वो मुस्कुराते हुए  जुल्फें लहड़ाती है
तेरा कच्ची मैदान  काली बादल की तरह ढक जाती है 
और छोटी लगती है

बंजर भूमि पर रुकी सूखी हरी घास लगाते हो
कभी मेरी महबूब से मिलो
देखने और सोचने मात्र से तरोताजा महसूस करता हूँ

तुम्हें क्या लगता हैं सिर्फ तुम्हें परेड आता है
जब भी उससे मिलने जाता हूँ
पहले दाहिने सज 
फिर 1,2,1..कह कर कदमताल कराती है
उसके बाद ही बात आगे बढ़ाती है

क्या तुम्हें लगता है सिर्फ तुम्हें पता है
ट्रेनिंग मीन्स टाइम होता है
एक बार उनसे भी एक सेकेंड देरी से मिलो
पनिशमेंट में hello hello सारी रात शीर्षासन hello कराती है

तुम्हारे यहाँ तो बारिश भी नही होती
ये तो बात बात पर आँखों से मूसलाधार बारिश करती है

और अंत में..

क्या लगता है तुम्हें सिर्फ तुम्ही से pop चाहिए
मुझे तो उस पगली से भी pop लेनी है

पगली कुछ भी न तो जानती है न ही समझती है
बस जीने का दूसरा नाम मोहब्बत कहती है
यहाँ से जाने के नाम पर गले लग कर पगली बहुत रोती है

Sunday, 26 February 2023

कुछ तो है जो छूट रहा है #BPA

जिन्दगी उस मोड़ पर आ गई है

जिस से जिन्दगी है

उसी से विदाई लेनी पड़ रही है

हाँ माने की थोड़ी मुश्किल है

यहाँ से जाने की ख्वाहिश भी तो अपनी थी

पहले पराया कहे,फिर अपना,अब  बेगाना भी कह देगें

सब कुछ छोड़ कर जाने की रिवाज़ है दुनियाँ में
इस रस्म को भी निभानी है

वक़्त किसी के लिए नही रुकता 
इस बात को भी समझनी है

एक पिजड़े को तोड़ देने की तैयारी थी
खुला दरवाजा सोच कर हैरानी है

उड़ते परिन्दें कब अपना घोंसला बनाया है
कभी इस डाल पर कभी उस डाल पर फिर शाम होते शहर छोड़ देगें

यहाँ का प्रशिक्षण महाभारत का युद्ध जैसे रहा
युद्ध जीत जाने पर अंत में अपनों का खोने का गम में गले लग कर रोयेगें

हाँ यहाँ से प्रशिक्षित होकर जायेगें
पर अपने सुनहले पल और अपनों की यादों को भुलाने में अप्रशिक्षित रह गए

और अंत में

हमेशा मन मे एक बात ही लगातार चल रहा है
कोई चीज है जो छूट रहा है
कोई चीज है जो आँखों से ओझल हो रहा है
कोई चीज है जिसे भूलना नही चाहते
कोई चीज है जिसे खोना नही चाहते
कोई चीज है जिसे से बिछड़ना नही चाहते
कई वादें हैं जिसे तोड़ना नही चाहते

कोई चीज है जो कुछ दिन और ठहर जा कह रहा हो

Saturday, 18 February 2023

लगता है नाराज़ होकर पहुंच गई है भोलेनगरी में

सफ़र में गुम होना अगर तो सीता जैसी
तुझे जंगल जंगल ढूंढता रहूँ वनवासी बनकर

इंतज़ार भी अगर करना होतो सती जैसी
तुझसे मिलने के लिए बार बार जन्म लेता रहूँ धरतीपर

मुझसे क्रोधित होकर बन जाना काली सी कल्याणी जैसी
मैं निर्बल बन जमीन पर लेटा रहूँगा भोलेनाथ जैसे

और अंत में

पगली नज़र नही आ रही है इस शिवरात्रि में
लगता है नाराज़ होकर पहुंच गई है भोलेनगरी में

जाते जाते

💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐
आप सभी को महाशिवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएं
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं

Friday, 17 February 2023

सुझाव

वो मुझे सुझाव तो देती है,
पर साथ नहीं देते ।।

ना तो नही कहती है
पर हाँ नही कहती

साथ तो चलती है
पर हाथों में हाथ नही थामती

वो मुझे हर वक्त देखती है
पर आँखों मे आँखों डाल कर नही देखती

वो मुझे सुनाती तो है
पर मेरी कभी नही सुनती है

Tuesday, 14 February 2023

स्नेह दिवस की पगली को भी शुभकामनाएं

कहते कहते मैं चुप हो जाऊँगा
फिर भी मैं मोहब्बत निभाऊंगा

बातें करते करते मैं खामोश हो जाऊँगा
फिर भी मैं मोहब्बत निभाऊंगा

चलते चलते मैं खो जाऊँगा
फिर भी मैं मोहब्बत निभाऊंगा

देखते देखते मैं आँखें बंद कर जाऊँगा 
फिर भी मैं मोहब्बत निभाऊंगा

वादा करते करते मैं तोड़ जाऊँगा
फिर भी मैं मोहब्बत निभाऊंगा

फिर से मैं लौट कर आऊँगा
गाते गाते मैं तुम्ही को गुनगुनाउँगा
लिखते लिखते मैं तुम्ही को लिख जाऊँगा
हाँ फिर से मैं मोहब्बत निभाऊंगा

Sunday, 12 February 2023

Tuesday, 7 February 2023

Happy 🌹Rose🌹 Day

Monday, 6 February 2023

कंधे में दर्द बहुत है

स्टार लगाने से पहले का बोझ है,या
जिम्मेदारी का भार बहुत ही अधिक है,या
न थकने वाली आदत की शुरुआत है,या
अपनों की परवाह/फ़िक्र का पुरस्कार है,या
चुपके से सब कुछ सहने का एक हिस्सा है,

और अंत में

थोड़ा बहुत पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है
थोड़ा बहुत जीने के लिए अंदर ही अंदर मरना पड़ता है

#BPET

Sunday, 5 February 2023

बजट

वो बजट की लोकलुभावन योजना प्रिय
मैं साधरण मध्यवर्गीय प्रिय

वो बजट की खूबसूरत धोषणा प्रिय
मैं टैक्स स्लैब में छूट का इंतज़ार करता प्रिय

वो खर्च की सालभर का लेखा जोखा  प्रिय
मैं हर महीने वेतन का इंतजार करता प्रिय

वो बजट सत्र की हंगामा प्रिय
मैं खाली जेब का सन्नाटा प्रिय

और अंत में

इतना लिखते ही मैं pop गया प्रिय
तब से ये अधूरा लिखा रह गया प्रिय

😂😂😂😂😂😂😂😂
कश्तियाँ सब की किनारे लगती है
बहाव अगर प्रतिकूल हो तो
हवाओं का रुख बदलने का इंतज़ार कर

Friday, 3 February 2023

Wednesday, 1 February 2023

दुश्मन अच्छा और स्तर का हो तो
लड़ने में भी मजा आता है

नही तो

दोस्ती भी अच्छा ,सच्चा और स्तर का न हो तो
वो दोस्त क्या दुश्मन भी बनने लायक नही होता

Sunday, 29 January 2023

चाय

ये चाय नही है साहब, आदत है
जैसे सुबह उठ कर, 
किसी से मिलना हो/अखबार पढ़ना है
किसी के होने के एहसास दिलाता है
सब कुछ अच्छा होगा, भरोसा दिलाता है
अपनापन का एहसास दिलाता है
रिश्तों को तरोताजा हर सुबह करता है
दोपहर का खालीपन का अपना साथी है
शाम में किसी का इंतज़ार करता है
किसी से बेवजह बातचीत का जरिया है
थकान, नींद,शिर दर्द का छूमंतर है

और अंत

एक पगली से मिलने का बहाना है
देर तक उसे बिना थके देखने का बहाना है
उसे बातों में उलझनें का सस्ता तरीका है

Friday, 27 January 2023

Thursday, 26 January 2023

इस कमजोर विद्यार्थी को भी..

वो मेरी 2 की पहाड़ा है
मैं उसका 17 का पहाड़ा हूँ
उसे याद दिलाना पड़ता है मैं तुम्हारा हूँ..
वो कहती है बहुत याद करती हूँ याद नही होते हो.

इस कमजोर विद्यार्थी को भी..
💐वसंत पंचमी की शुभकामनाएं💐

Monday, 23 January 2023

मर्द

असली पुरुष वही हैं, जो हर स्त्री का सम्मान करे ...
न कि सिर्फ अपनी पसंदीदा स्त्री का।।

Sunday, 22 January 2023

झूठी दुनियाँ के बीच में
मुझे वो पगली पसंद है 
मुस्कराती रहती है हमेशा
मुझे उसकी नाराजगी पसंद है
थोड़ी सी नाज़ुक है वो
फिर भी मुझे वो पगली पसंद है

Friday, 20 January 2023

अब वो इश्क में भी
कानून का पाठ पढ़ाती है
जब भी मिलने जाता हूँ
एक मिनट के देरी पर..

पहले दाहिने सज 
फिर 1,2,1..कह कर कदमताल कराती है
उसके बाद ही बात आगे बढ़ती है

Wednesday, 11 January 2023

Friday, 6 January 2023

किसी को इश्क़ हुआ bpa से
किसी को इश्क़ हुआ bpa में
किसी का इश्क टूटता bpa से
किसी का इश्क़ टूटता bpa में

अरे मुझे तो इश्क़ हुआ तुम्ही से
और हम तो इश्क़ में टूटे तुम्ही से

Saturday, 31 December 2022

आख़री खत

उसे लिखी हुई सारी चिठ्ठी सँभाल कर रखा है
उसी में कहीं सारी मोहब्बत छुपा रखा है

आज आखरी ख़त है उसके नाम
ऊपर लिखा है नाम  उसका

प्रियतम भाग्यश्री लक्ष्मी



नीचे लिखा है
मैं सिर्फ़ तुम्हारा

Friday, 30 December 2022

जब उसने मेरी तरफ देखी

काजल में गुस्सा
आँखों में बादल
गालों पर समुंदर
चेहरे पर लाली
होठों पर खामोशी
बालों में नफरत 
मांग में सपना
गले मे शब्द
हृदय में मोहब्बत
हाथों में छड़ी
मेंहदी में नाम
पाँव में रुनझुन
पैर में ठहराव
चूड़ी में थकान
आँचल में छाँव
बाहों में इंतज़ार
..
और अंत में

मैं घुटना टेके हुए सामने
बिन बादल बरसात में भीगें

जाते जाते

पगली कुछ भी नही समझती है
बस जीने का दूसरा नाम मोहब्बत कहती है

Wednesday, 14 December 2022

थोड़ी सी गोरी है
आंखों में काजल है ज्यादा 
पर दिल रखती है पत्थर का

थोड़ी सी खुश रहती है
हँसती है उससे ज्यादा
पर देख कर मुँह फूलती है

खाती है कम
शरीर मे ताकत है उससे भी कम
पर पांव दबवाती है मुझसे ज्यादा

मिलती है कम
देखकर चुप रहती है उससे ज्यादा
पर सपनों में सवाल जवाब करती है ज्यादा

Sunday, 11 December 2022

गोरी है कम ..... आँखों में काजल है ज्यादा

गुस्सा है ज्यादा
वजन है कम
लग गई ठंड

दौड़ती है ज्यादा
खाती है कम

बोलती है ज्यादा
सुनती है कम

बेहोश होती ज्यादा
होश में रहती कम

बीमार रहती है ज्यादा
ठीक रहती है कम

कुरकुरे खाती है ज्यादा
काजू खाती है कम

दवाई खरीदती है ज्यादा
पर खाती है  कम

नखरा करती ज्यादा
नाराज होती कम

और अंत में

गोरी है कम
आँखों में काजल है ज्यादा

Friday, 9 December 2022

वो और भी खूबसूरत होते जा रही ...

वो नाराज़ हो होकर 
और भी खूबसूरत होते जा रही 

और मैं इतंज़ार में
धीरे धीरे और भी उसका होते जा रहा

वो होठों से कहती नही
और मैं सुनने को बेकरार होते जा रहा

उसे कुछ कहना है
कह के कुछ सुनना है

सुनकर हमेशा उसका सुनना है

उसकी हाथों  को थाम कर
कुछ कदम साथ चलना है

उस पर मेरा भरोसा है
उसका भरोसा उम्र भर निभाना है

आज उस से मिलकर
हमेशा के लिए उसका हो जाना है

Sunday, 6 November 2022

379 कहानी की अगली कड़ी

379 की आज की कहनी

 जिस रूम में वे रह रहे हैं वह पूर्णरूपेण वातानुकूलित A/C रूम है..उसका तापमान 21℃ है, जिसके कारण इस मौसम में उनका तबीयत खराब हो गया है.. सर्दी, खाँसी.. जुखाम..आवाज फस गया है ...
मैंने कहा temp. ज्यादा कर लीजिए..30 के आसपास..

वे बोले temp. कम ज्यादा करने नही आता है 😂😂
सुझाव दिए  किसी से कह कर temp ठीक करा लें.....
वो बोले हैं.. सबको पता चल जायेगा.. कि उनको temp. भी कम ज्यादा करने नही आता है
बेचारा .. इज्ज़त बचने के लिए ठंड में जीवन गुजार रहे हैं...

379 कहानी की अगली कड़ी


आज का घटना..

आज मेरे रूम 379 आयें बोले कुछ खाना है.. कहते कहते वो धीरे से गोदरेज की तरफ गये और शनैः से गोदरेज का गेट खोलते हैं... और अपना पूरा शिर इस तरह से रैक के नीचे करते हैं जैसे कोई नया ग्रह का खोज करने वाले हैं... और रैक से अपना शिर निकालते हुए अपने डमरू जैसे चेहरा बनाते हुए मुझे देखते हैं.. बोले इसमें खाने का सामना तो सिर्फ किशमिश है.. और अपना पूरा मुठ्ठी भर किशमिश ले कर हँसते हुए निकल गए...और पहला निवाला किशमिश खाते हुए.. कहते हैं.. .. ई तो पूरे कच कच बालू जैसे लगे हो.. और पूरा मुठ्ठी भरा किशमिश बाहर फेंक दिए...
 ...     और बोले ...क्या और कैसा खरीद लिया पूरा बालू जैसे करता है...
मैं ये सारी घटनाक्रम देखकर🤣🤣😂😂 हंसने लगा..☺️
...मतलब मैं सारा मामला समझ चुका था..*मतलब वो मुनक्का को किशमिश समझ कर खा गए हैं..* अच्छा नही लगने पर सब फ़ेक चुके थे...
   
और अंत में
पता नही आगे 379 क्या करेंगे... 🙄

Saturday, 5 November 2022

वे असल मे कब मुस्कुराते है

ये जो
हर बात पर
हर किसी से
मुस्कुराकर बात कर लेते हैं
कोई बताये
वे असल मे कब मुस्कुराते हैं

Friday, 28 October 2022

मेरे कमरे में

मेरे कमरे में
मैं हूँ, कुछ किताबें और उसकी यादें हैं
मिठाई, कुछ बिस्कुट, और कुरकुरे हैं
आँशु, कुछ सिसकियां और मजबूरियां हैं

और अंत में

कुछ मेरी, कुछ उसकी, और हम दोनों की कहानी है..
आप सबों को सुननी है..उसकी जुबानी है

Tuesday, 25 October 2022

वो दीपावली की अगली सुबह की तरह है

वो दीपावली की अगली सुबह की तरह है
फिर से रोज की तरह घर,आँगन सँवारेगी

वो दीपावली की अगली दोपहर की तरह है
फिर से सारा पिछला हिसाब कर बात सुनाएगी

वो दीपावली की अगली शाम की तरह है
फिर से तिनका तिनका जमा कर घर सजायेगी

वो दीपावली की अगली रात की तरह है
फिर से सारी रात ख़ामोशी से गुजारेगी

और अंत में

वो मेरी ज़िन्दगी के अमावस्या की पूर्ण चाँद की चाँदनी है
उसके बिना क्या पर्व त्योहार सब फीका है

ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद.....तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा

ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद
तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा

सर पर तेज धूप है, हाथों में झाड़ू है
साफ़ सड़कों पर भी झाड़ू लगता हूँ
यहाँ सम्मान कम है, सैलरी उससे भी कम है

ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद
तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा

छुट्टी है उसमें भी ड्यूटी है
ये पर्व त्यौहार छुट्टी में क्यों चले आते हो
तू पैतृक और गृह जिले में अन्तर कर जाते हो

ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद
तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा

यहाँ से जाने के बाद
तेरी हर बुराई के बदले अच्छाई बताऊंगा
तुझसे मिलने की तम्मना का गाना गुनगुना कर सुनाऊंगा

ऐ BPA यहाँ से जाने के बाद
तेरा किस्सा अलग से लिखूँगा

और अंत में

यहाँ कोई ऐसा नही
जिस पर भरोसा हो

Monday, 24 October 2022

एक दीया मैंने भी जलाई है..मोतिहारी

एक दीया मैंने भी जलाई है.. जिसमें उम्मीदों का बाती है.. जो तेल/तिल से नही बल्कि हमारी विश्वासों से जलता है....इस दीये की लो..हमारी आशा और भरोसा है.. जिसके कारण दुःख से सुख की ओर.. निराश से आशा की ओर.. और अंधेरे से उज्जाले की ओर ले जाता है...
जिंदगी में अभी भी बहुत अच्छा होना बाँकी है.. इसलिए भी ये दीये की छोटी लो होने के बाद भी पूरी रात सान से जलेगा..
      ये दीया तेज हवा, सीत,कुहासे,..आधुनिक प्रकाश के बीच सारी रात डट कर लड़ते, सबरते..खुद को बुझनें से बचायेगा...ये हमे बुरे वक्तों से लड़ना सिखाती है...दीये की लो..हमें हिम्मत, साहस, खुद पर भरोसा करना सिखाती है.. कभी भी आखिरी क्षण तक आपना कर्म करना भी सिखाती है...

और अंत में

आप अपने हाथों से एक दीया जरूर जला कर अपनी चौखट,आँगन ..अपनी देहरी पर जरूर रखियेगा.... ये हमे घर,आँगन, अपनो का एहसास भी कराती है..

शायद लिखनें में देरी हो गई है.. माफ़ी चाहता हूँ..

आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं..

💐💐💐💐💐💐💐

Monday, 17 October 2022

मेरी दवा

इस अजनबी शहर में जब बीमार पड़े
डॉक्टर साहब पर्ची पर लिखे
सबसे पहले अपनो से मिल आओ..


मैं उस डॉक्टर साहब का नियमित मरीज बन गया 

जिसने पर्ची पर दवा में उससे मिलना लिखा है

Sunday, 16 October 2022

समझदारी v/s मोहब्बत

नाराज़गी भी उसी से है
नज़रे भी उसी पर अटकी है

शिकायत भी उसी से है
सनम भी मेरा वही है

हजार कसमे हैं उनसे न मिलूं
हर वक़्त इंतज़ार भी उन्हीं का है

थक कर हर रोज सो जाता हूँ
वो मेरे अंदर रात भर जागती है

और अंत में

सारी समझदारी एक तरफ
उनसे मोहब्बत एक तरफ

Saturday, 8 October 2022

घर वापसी

जो 2 दिन के PL दे सकते नही हैं
वो 10 दिन के छुट्टी पर भेजें हैं

जिला वापस तो भेज सकते हैं
पर  वापस बुला सकते नही

जो ट्रेनिंग मीन्स टाइम कहते थे
वो कुछ के लिए pop में सिटी बजाते हैं

जो संडे आउट पास देने से कतराते थे
अब इधर हर समय खुली हवा में घूमते रहते हैं

उधर 9:30 सुबह से 8:00 रात तक क्लास करते
अब इधर इतने समय मे चादर तान कर सोते हैं

उधर छुप छुप कर छत पर बाते करते थे
इधर दोस्तों को खोज खोज कर बात करते हैं

मेस का खराब खाना से तंग आकर
अब इधर ही तंदूरी रोटी तोड़ते हैं

उधर रिपोर्ट हो जाएगा से डरते थे
इधर रिपोर्ट किस पर करूँ उसको  ढूंढते हैं

उधर पगली के साथ घूमता था
इधर खुद ही पागल बन घूमता हूँ

और अंत में

इतनी आज़ादी में भी पिंजड़े से ही मोहब्बत कर बैठा हूँ
Bpa वापस जाने की अब बहुत जल्दबाजी है

Friday, 7 October 2022

वो लड़की याद आती है....

ये दुनिया प्यार के किस्से मुझे जब भी सुनाती है... 
वो लड़की याद आती है.....

कभी खुशबू भरे खत को सिरहाने रखकर सोती थी,
कभी यादों के बिस्तर से लिपटकर खूब रोती थी 
कभी आंचल भिगोती थी, कभी तकिया भिगोती थी..2 
ये उसकी सादगी है जो हमें अब भी रुलाती है 
वो लड़की याद आती है.........

चली आती थी मिलने के लिए, 
हील-ए-बहाने से गुजरती थी 
क़यामत दिल पे उसके लौट जाने से. 
मुझे बेहद सुकून मिलता था उसके मुस्कुराने से 
उतरकर चांदनी जिस वक्त छत पर मुस्कुराती है.. 
वो लड़की याद आती है.....

वो मेरा नाम गीतों के बहाने गुनगुनाती थी 
मैं रोता था तो वो भी आंसुओं में डूब जाती थी 
मैं हँसता था तो वो भी मुस्कुराती थी
अभी तक याद उसी की प्यार के वो गीत लुटाती है 
वो लड़की याद आती है.....

जहा मिलते थे दोनों वो ठिकाना याद आता है 
वफ़ा का दिल का चाहत का फ़साना याद आता है 
उसका ख्वाब में आकर सताना याद आता है 
वो नाजुक नरम उंगली अब भी मुझको गुदगुदाती है 
वो लड़की याद आती है.....

याद का सावन किताबो को भिगोता है 
अकेले में ये मुझको महसूस होता है

लड़की याद आती है …..

मैं अपने ज़िन्दगी का

मैं तकलीफ़ और मायूसी लिखता हूँ
और वे कहतें हैं मैं अच्छा लिखता हूँ

मैं उथल पुथल लिखता हूँ
वो इसे रोमांचित कहानी कहती है

मैं पीड़ा लिखता हूँ
वो इसे खूबसूरत एहसास कहती है

मैं दर्द लिखता हूँ
वो इसे जिंदगी का तजुर्बा कहती है

मैं थकान लिखता हूँ
वो इसे कठोर परिश्रम कहती है

मैं परेशानी लिखता हूँ
वो इसे न भूलने वाली  सबक कहती है

मैं मुसीबत लिखता हूँ
वो इसे ज़िन्दगी जीने का प्रशिक्षण कहती है

और अंत में

मैं मिलना लिखता हूँ
वो इसे सब्र और इंतज़ार कहती है

Waiting to bpa

Wednesday, 5 October 2022

भीड़ का नया कारण/प्रकार भी..

दुर्गा पूजा मोतिहारी ..
मेरा यहाँ अभी भीड़ और जाम है..

65 वर्षीय दंपत्ति मंदिर के मुख्य द्वार पर किसी बात को लेकर मतभेद हो गया है...65 वर्षीय नायिका नायक को धमकी दे रही है.. कभी कभी बीच मे आँख और ऑंगली भी दिखा रही है...
यह सब देख भीड़ चारो ओर से घेर लिया है.. हटने का नाम ही नही ले रहा है.. मेरी आवाज dj/साउंड की आवाज के कारण किसी को शायद सुनाई नही दे रहा है...
बेचारा नायक इस उम्र में भी चुपचाप है सिर्फ नायिका की बात सुन रहा है.. और डांट भी...
नायक सिर्फ इतना कह पा रहा है चलो घर.. अपनी बाईक पर बैठने  की ओर इसारा कर रहा है... नायिका बस इतना कहती है.. तुम्हारे साथ नही जायेगें... और कह रही है तुमको छोड़ेंगे नही..

नायक बार बार यही कह रहा है घर चलो.. नायिका उसके साथ जाने का नाम नही ले रही है... बस उसे डांटे जा रही है...
यह सब देखकर.. भीड़ बढ़ते जा रहा है...
और अंत में..
नायक बुझे मन से बाइक से अकेले लगता है घर चला गया है....नायिका बगल होकर किसी को कॉल कर रही है.. गुस्से से
आगे क्या..
भीड़ स्वभाविक रूप से अब खत्म हो गया है..

Tuesday, 4 October 2022

Monday, 3 October 2022

कर्तव्य और जिम्मेदारी के बीच सब्र और इंतज़ार

परदेश में भी तुझे याद करता हूँ
हर चहरे में तुझे ढूंढने का कोशिश करता हूँ..

व्यस्तता तो बहुत बढ़ गई है नये शहर में
फिर भी हर पल में तुझे याद करता हूँ

वादा तो था इस दशहरा अपनी दुर्गा के साथ देखूंगा
परंतु बहरूपिया महिषासुर को रोकने की जिम्मेदारी आ मिली है

जितना दूर रहता हूँ उतनी मोहब्बत होती है तुझसे
जितनी मोहब्बत होती है तुझसे उतनी जिम्मेदारी समझ आती है मुझमें

और अंत में

तेरे बिना ये शहर सुनसान लगता है
पूरा भरा शहर कब्रिस्तान  लगता है

Saturday, 1 October 2022

ज़िन्दगी और कुछ भी नही, तेरी मेरी कहानी है

मैं बेवकूफ हूँ, वो मेरी दिमाग़ है
मैं शिर दर्द हूँ, वो एस्पिरिन है
मैं फ्रेक्चर हूँ, वो क्रेक बैंडेज है
मैं मोच हूँ, वो आयोडेक्स है
मैं बुख़ार हूँ, वो पैरासिटामोल है
मैं वे वक़्त हूँ, वो हर वक़्त है
मैं मुसीबत हूँ, वो समाधान है
मैं बीमार हूँ, वो इलाज़ है

और अंत में

ज़िन्दगी और  कुछ भी नही, तेरी मेरी कहानी है

 और एक बात

अगर पुनर्जन्म होता है तो अगले जन्म में भी तुम्हारे सुख-दुःख का साथी बनना मेरी पहली और आख़री ख्वाहिश होगी..!

Wednesday, 14 September 2022

अंग्रेजी को भी हिंदी दिवस की शुभकामनाएं

वो अंग्रेजी में ग़ुस्सा करती है
      डांट देती है हिन्दी में...
वो आँख दिखती है अंग्रेजी में
      मुझे महसूस करती है हिंदी में...
वो मुझसे नाराज़ रहती है अंग्रेजी में
      मुझे मनाना पड़ता है हिंदी में...
वो मुझे अंग्रेजी सीखाने के चक्कर में
      बोलती है हर बात मुझसे हिंदी में..

और अंत में

मैं  अ आ इ ई उ कहता हूँ
वो  abcde समझती है
मैं हाँ कहता हूँ वो Nhi समझती है

जाते जाते

वो मेरी बात पर हाँ कहने के बदले
नही को भी Nhi लिख देती हैं

इस हिंग्लिश वाली मोहतरमा को भी

हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


Saturday, 27 August 2022

ख़्वाब

ख़्वाब कहाँ सपनों में भी मुक़म्मल होता है..!

जिम्मेदारी तले दबे होने से नींद भी ठीक से नही आती है..!

Thursday, 11 August 2022

दोस्त

जो आने वाली समस्याओं से आगाह करता हो
जो मेरी बुराइयों को मुझे बता कर दूर करता हो
जो मेरी हर अनकही बातों को समझा करता हो
जो मेरे न रहने पर वही कार्य करता हो जो मैं करना चाहत हूँ
जो मेरे चहरे देख कर मेरा हाल कह दे
जो मेरी समस्या को देख कर, गले लगा कर कहे सब ठीक कर दूँगा
जो मेरे जीवन को विकास पथ पर आगे बढ़ाए

और अंत में

जो दिल में दिमाग़ नही रखता हो

Sunday, 31 July 2022

क्या इश्क से बचकर भागनें वाले बेवफ़ा नही होता

क्या गलतफहमी में रहने का सदमा कुछ नही होता
वो तो सब कुछ जानती थी समझा तो सकती थी
क्या इश्क से बचकर भागनें वाले बेवफ़ा नही होता..
इश्क में पड़ जाने में भी बंदे का बचता कुछ नही

पूरे सावन भी पतझड़ लगता है

महादेव से सावन में सिर्फ इतनी सी विनती है

सावन में भी कोई अपनों से नाराज़ ना हो..
इस सावन कोई अपनों से नही रूठे..

नही तो पूरे सावन भी पतझड़ लगता है

Saturday, 30 July 2022

जब से दिल में दर्द तेज हुआ है

जब से दिल में दर्द तेज हुआ है
तब से उसकी याद तेज हुआ है
कोई ख़बर दो उनको..
         रुक जाओ यार..
उसकी क़दमो की आहट से
फिर से दिल में दर्द तेज हुआ है
कोई दौड़ के जाओ उसके पास
और कह दो...थोड़ा आहिस्ता चले
उसकी क़दमो की आहट को दूर से पहचान लेते हैं
लगता है फिर से दिल मे दर्द तेज हुआ है
आहिस्ता आहिस्ता मेरे करीब आ रही है
...

Friday, 29 July 2022

BPA ड्राइविंग उस्ताद के द्वारा ज़िन्दगी जीने का सीख

गाड़ी पहली बार चलाना शुरू करें तो....
अगर जाना विपरीत दिशा में क्यों न हो..पहले बैक गियर नही लगाएंगे..सबसे पहले वह गियर लगाते हैं जो गाड़ी को आगे बढ़ाये..चाहे शुई का एक नोक इतना आगे क्यों न चले..उसके बाद ही बैक गियर लगायेगें...

फिर समझाते हैं

वक़्त को पीछे मत मोड़िये.. समय/घड़ी की कुदरती गुण है आगे बढ़ना..इसलिए मनुष्य को हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए.. प्राकृति के विरुद्ध नही चलना चाहिए।...अतः ज़िन्दगी की गाड़ी को हमेशा आगे ही बढ़ाते हैं..
बोलते बोलते उस्ताद हँसने लगे..और कहें समझे कि नही समझे..
और हम सब चुपचाप सुन रहे थे..

और अंत में

कोई कोई आदमी छोटी से बात पर बड़ी सीख दे जाते हैं

जाते जाते

जय हिंद सर

जो मेरे दिल मे बसती है उसकी बस्ती

हम जिस बस्ती में हैं
उस में हम बसते नही
जो हमारे अंदर बसते हैं
उसमें हम बसते नही
बसना है मुझे 
उसके साथ बस्ती में
जो बसती है मेरे अंदर

और अंत में

बहुत दूर है वो बस्ती
जहाँ वो बसती है
वहाँ जाने में कई बार बसता हूँ
जो मेरे दिल मे बसती है उसकी बस्ती

Thursday, 28 July 2022

हाँ मीरा मैं भी हूँ तुम्हारी तरह

गुज़रता हूँ मैं भी, मीरा तुम्हारी तरह
सफ़र में मैं भी, पर पूरा नही होता
आधा हूँ मैं भी, मीरा तुम्हारी तरह
डगर पर मैं भी, पर ठहरा नही होता
दुनियाँ वाले क्या जाने इकतारे की पुकार
घर में रहता हूँ पर ख़ुद में नही रहता तुम्हारी तरह
आधा हूँ मैं भी पूरे की तलाश में तुम्हारी तरह
नींद में,होश में, बेहोश में, हाँ मीरा मैं भी हूँ तुम्हारी तरह

Wednesday, 27 July 2022

दुनियाँ में 3 ही तरह के रिश्ते/लोग अपनें होते हैं

दुनियाँ में 3 ही तरह के रिश्ते/लोग अपनें होते हैं
1. माँ और पिता जी
2. भाई और बहन
3. पत्नी/पति और बच्चे
बाँकी सब टांग खींचने वाले..बोले तो..मौके का फायदा उठानें वाले
यही सत्य है चुपचाप मान लीजिए..

Friday, 22 July 2022

वो कहती है,धीरे चलते हो

वो कहती है,धीरे चलते हो
मैंने कहा
उम्र भर साथ चलने का वादा करिए तो
कदम से कदम मिलाकर चलूँगा,न आगे न पीछे,
हाथ मजबूती से नही बल्कि सलीके से पकरूँगा
सुनसान रास्ते पर अपनापन लगेगा,राहे कितनी भी मुश्किल क्यों न आसान लगेगा,तेरा मेरे साथ होने से ही जिन्दगी आसान लगेगा...ज़िन्दगी के राहों में कभी भी अकेला नही छोड़ूंगा..
और अंत में
मैं धीरे धीरे इसलिए चलता हूँ कि जिंदगी के कुछ पल तुम्हारे साथ जी सकूँ..!

Saturday, 16 July 2022

बुलाती है तेरी बाँहों का सहारा

ये कागज़, पत्ता, नदी का किनारा
ये खिड़की, हवा,धूप का साया
ये आँखे, हंसी, जुल्फों का साया
बुलाती है तेरी बाँहों का सहारा

ये बूंदे, सबनम,खेतों का किनारा
ये बादल, बारिस,पानी की धारा
ये होंठों, बिंदी, आँचल का साया 
बुलाती है तेरी बाँहों का सहारा

ये राहे, नदियां, उसी का किनारा
ये यादें, बातें, आँशु का धारा
ये पायल,झुमके,नजरों का साया
बुलाती है तेरी बाँहों का सहारा

Thursday, 14 July 2022

जो मैं हूँ.....जो मैं नही हूँ

खुद ही जोकर बन
यहाँ सब को हँसाए हैं

और क्या बतायें

खुद ही रोये हैं
खुद ही चुप हुए हैं

सच होकर भी
खुद को गलत साबित किये हैं

और क्या

सब के लिए मैं हूँ
मेरे लिए मैं खुद भी नही हूँ

उसको ढूढ़ते ढूढ़ते 
खुद से दूर हुआ हूँ

उसको बचाते बचाते
खुद को ही जलाएं हैं

और क्या लिखूं..

जो मैं हूँ
जो मैं नही हूँ

शिव ही नही सावित्री भी पूजा जाए

समुद्र से गहरा, 
                        स्त्री का समझ
आँख से गहरा 
                       स्त्री का नज़र
बादल से गहरा, 
                       स्त्री का बात
आँगन से गहरा,
                       स्त्री का आँचल
कब्र से गहरा, 
                        स्त्री का सब्र
और अंत में
    
      सावन के पहले दिन पर भारी
      स्त्री के अंतर्मन की बारिस

जाते जाते

शिव ही नही सावित्री भी पूजा जाए

श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं

Tuesday, 12 July 2022

ये काली रात ज़रा...आहिस्ते से गुजरना..

ये काली रात ज़रा...आहिस्ते से गुजरना..
कोई अपना है ...जो सो रहा है
एक ज़रा सा ख्वाहिश है मेरी
सूरज को कल देरी से उगने देना...
उसे सुबह उठने में देरी होगी..

Saturday, 9 July 2022

सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

ना नींद बाँटती है
ना बातें बाँटती है
ना ख्वाब बाँटती है
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

ना दर्द बाँटती है
ना कहानी बाँटती है
ना फटे हुए एड़ी की छाप बाँटती है
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

ना दिन बाँटती है
ना रात बाँटती है
ना मेहनत का थका हुआ हिस्सा बाँटती है
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

ना सुखी हुई रोटी बाँटती है
ना घटा हुआ सामान बाँटती है
ना फटे हुए कपड़े की हिस्से बाँटती है
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

मैं देखता हूँ
मैं तड़पता हूँ
मैं रोता हूँ
मैं इंतज़ार करता हूँ
फिर भी
सब कुछ अपनें हिस्से रखती है

Tuesday, 5 July 2022

नमस्ते यशपाल, सप्रेम हरिस्मरण !

नमस्ते यशपाल, 
सप्रेम हरिस्मरण !

अपना जन्म किसी को याद नही रहता है, पर इतना तो सच है, आपनें जो नये जीवन की शुरुआत की है वह पुनर्जन्म हुआ है आपका और मैं स्वागत् करता हूँ इस नए जीवन पथ पर, आपके  साथ हाथ पकड़ के चलने वाली हर सुख दुःख की जो संगिनी है,उसके साथ सुनसान रास्ते पर अपनापन लगेगा, हर सपना सच लगेगा, हर ख्वाहिश पूरी होगी, दिल और मन की हर मुराद पूरी होगी.... बस अपनी सीता जैसी धर्मपत्नी का हाथ पकड़े रहियेगा.., आपकी हर इच्छा की पूर्ति होगी...हर मुसीबत से लड़ने की शक्ति मिलेगी...,। मैं भगवान से दुआ माँगा हूँ... की आपको सात जन्म नही चाहिए जीने के लिए बस इसी जन्म में सातो जन्म के बदले सारा जीवन दे दे और इसी जन्म में सारा प्यार देदे जो आप दोनों के बीच सदा बना रहे... बाँट बाँट कर ना तो जीवन ना ही प्यार देना... सब कुछ इसी जन्म में दे देना भगवान!

धागा है ये प्रेम का जीवन का विश्वास, 
एक दूसरे में घुलें प्राण बसे ज्यों साँस ! 

सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए ...
 हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ....!!

छोटी बहन को खुला पत्र

चिरायु छोटी बहना
स्नेहशील आशीर्वाद
बहुत मुश्किल हो रहा है कुछ भी लिखने में फिर भी वादे के अनुसार लिख रहा हूँ..सच कहूँ तो
मन मे ख़ुशी है चहरे पर गम की परछाई है..
भारी मन से तेरी डोली को कंधे पर रखने की तैयारी में हूँ
मुझे बचपन का कुछ घटना धुंधली सी याद है
मन ही मन याद कर रहा था की एक जमाना था जब घर में लुड्डो भी खेलनें देना दूर के बात छूनें भी नही देते थे। बहुत मुस्किल से जब खिलाड़ी घट जाता तब एक, दो चान्स मिलता था... सच कहूं तो तुमसे अच्छा कोई नही खेलता था.. छु-ती-ती-ती, चोर-सिपाही, क्रोस- ज़ीरो, कैरम बोर्ड.. बैटमिंटन... यदि सब वाला खेल में मौका मिलते...तुम अच्छी खेलती थी यह भी याद है..

मैं घर में अलग ही कारनामों के लिए चर्चित था पर तुम छोटी ..गलती से भी किसी कुत्ते पर भी पत्थर उठा कर नही फेकी होगी।कभी भी गुस्से से गिलास भी उठा कर नही पटकी होगी। हाँ अगर गुस्सा ज्यादा आने पर देर तक खाना बनाने के साथ एक दो रोटी जरूर ज्यादा बना देती थी...मुझे सारी बात अच्छी से याद है...

अपने परवरिस और परिस्थितियों के विपरीत भी बहुत मेहनत और पढ़ाई की है जिसपर मुझे गर्व है...

जैसे जैसे तुम्हारी विदाई का वक़्त नजदीक आ रहा है वैसे वैसे ..पुरानी बातें याद करता हूँ तो ...तुम्हारी हर बात मुझे सही लग रहा है... और एक बात कहूँ... मेरे सफलता में और जीवन मे तुम्हारी बहुत योगदान है.. मैं ऋणी हूँ बहन तुम्हारी..जब याद करना मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा मिलूँगा...

आज मैं संकल्प लेता हूँ की तुम्हारी स्वतंत्रता, आज़ादी, पसंद, नापसंद, तुम्हारी हर इच्छा को सर्वोपरि स्थान दूँगा। तुम्हारी विकासपथ पर कभी भी धर्म, समाज का रीति रिवाज, प्रथा का आँच नही आनें दूँगा..जब भी बुलाओगी मैं हर परिस्थिति में तुम्हारे लिए जरूर आ जाऊँगा... ये अटल प्रतिज्ञा है मेरी....
जो गलतियाँ हो गई तो हो गई अब अपने बराबर तुझको भी अधिकार दूँगा ही नही बल्कि किसी तरह का अंतर या भेदभाव नही करूँगा।

और अंत में
ऐ छोटी तुम्हारे जाने के बाद तुम भी जानती है मेरा मन नही लगेगा..जब मेरा मन करेगा बिना बोले तुमसे मिलने आ जाऊंगा..मन मत करना कि पहले मोबाइल से कॉल क्यों नही किये...
और है एक बात ..घर मे जितना तुम्हारा सामान है सब उसी तरह रहेगा..साथ ही तुम्हारा रूम भी ..जब दिल करे आ जाना..सब कुछ वैसे ही मिलेगा..जैसे तुम छोड़ गई होगी...

जाते जाते...
तुम्हारी याद हम सभी को बहुत आयेगी...बहुत मुश्किल हो रहा...तुम्हारे बिना यहां कैसे सुबह होगा...पगली की तरह हर किसी का बात मानती थी..हर बात पर हाँ कह देना की मैं कर लूँगी...बाबूजी और माँ का ख्याल तुम से ज्यादा कोई नही रख पायेगा... ये तुम भी जानती हो...
फिर मैं कोशिश करूंगा..

आगे क्या लिखूं.. अब हिम्मत नही   हो रही है..
अपना ख्याल रखना छोटी..
                              तुम्हारा बेवकूफ भाई
                            जिसे कुछ नही आता है

Saturday, 2 July 2022

सीने में एक पगली सी लड़की रहती है

बात करते हैं तो झगड़ती है न करू तो लड़ती है

मिलते हैं तो बात सुनाती है न मिलूँ तो मुंह फुलाती है

देखूं तो आँख दिखती है न देखूं तो ढूंढती है

खुशी में उपवास रखती है नाराज होकर भूखे रहती है

दूर रहूँ तो हक जताती है पास रहूँ तो नखरे दिखाती है

सीने में एक पगली सी लड़की रहती है। जब भी याद आते हैं तो गले लिपट कर रोती है..और  चुपके से मेरे अंदर छुप कर भी रहती है...
सच कहूँ तो ये पगली ही मेरी पूरी दुनियां है..इसके बिना मैं कुछ सोचता भी नही हूँ

Thursday, 30 June 2022

धर्मप्रेमिका के साथ नही से हाँ तक का सफ़र

नही से हाँ तक का सफ़र

बिल्कुल नही
नही...नही
ना...ना
नही...हाँ
हाँ...नही
हाँ...न
हाँ...
हाँ... हाँ
सचमुच हाँ
हमेशा हाँ

और अंत में
छोड़ेंगे न हम तेरा साथ ओ साथी मरते दम तक.

Saturday, 25 June 2022

12 बरस का वनवास

इस बात से ही खुश रहा करो दोस्त

जिस दुनियाँ वो रहती है न
उसी दुनियाँ में कहीं तुम भी रहते हो..☺️

Friday, 24 June 2022

बर्तन धोने की इच्छा

जब किसी को उम्मीद से ज्यादा खूबसूरत पत्नी, मिल जाए न
तो पुरूष के अंदर अपने आप, बर्तन धोनें की इच्छा जग जाती है

Wednesday, 22 June 2022

ज़िन्दगी के रिश्तों में लड़की का होना आवश्यक है

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
ज़िन्दगी के रिश्तों में लड़की (मां, बहन, बेटी, दोस्त,धर्मप्रेमिका, पत्नी..) का होना बहुत जरूरी है..क्योंकि ये सभी हमे...
 
...जीना भी सिखाती है
...अपनोंपन का एहसास दिलाती है
...विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत देती है
...समस्याओं को साझा करना सिखाती है
...खुद आधा पेट खा कर,अपनों का पेट भर खाना खिलाना सिखाती है
...एक रोटी खा कर, कैसे जीया जाता है.. ये भी सिखाती है
...अपनों का पल-पल कैसे ख्याल रखा जाता है, ये भी सिखाती है
...खुद पर भरोसा करना सिखाती है
...मर्यादा में रह कर हर तकलीफें की दीवारें तोड़ना सिखाती है..
...बिना बोले,बिना रुके हर काम करना भी सिखाती है...

और अंत में

..हर मुश्किल में हँस कर कर्तव्य पथ पर चलना भी सिखाती है।


समर्पित सभी psi वीरांगनायें...!

सभी को हृदय के अंतिम गहराई से सिर ऊँचा कर सलाम करता हूँ
🫡
जय हिंद मैडम सर

Sunday, 19 June 2022

तुम्हें तो खुद से भी प्यार करना है

किसी को खोजते खोजते 
इतने दूर मत चले जाना
जहाँ खुद को ही खो देना

अरे रुक पगले.....

तुम्हें तो खुद से भी प्यार करना है

मेरे पिताजी बस इतना ही कहते हैं..

कभी भी हिम्मत नही हारना
कितनी भी विपरीत परिस्थिति क्यों ना हो
कभी भी घबराना नही
कभी भी ऐसा काम नही करना
जिस से गर्दन झुकाना परे
कभी भी किसी के सामने घुटना नही टेकना
हमेशा ईमानदारी के साथ जीना
अपनों का साथ कभी भी नही छोड़ना
अपना कोई रूठे तो तुरंत झुक के मना लेना
हमेशा मजबूत विशाल और छायादार पेड़ बनकर खड़ा रहना
ताकि सभी को छांव मिल सके
हमेशा अपने आत्मसम्मान के साथ जीना
हमेशा चरित्रवान बनना और दाग मत लगने देना

और अंत में
मेरे पिताजी मेरा गुरुर हैं
मेरे पिताजी मेरा भरोसा हैं
मेरे पिताजी मेरे रियल हीरो हैं
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

Friday, 17 June 2022

सफलता और असफलता

किसी भी परीक्षा में सफलता और असफलता मेरे लिए महत्वपूर्ण नही है....

मैं सिर्फ ज़िन्दगी की परीक्षा में सफल होना चाहता हूँ....
मेरे लिए सिर्फ और सिर्फ यही महत्वपूर्ण है...

Wednesday, 15 June 2022

बेवफाओं से बिछड़ कर, 
अबकी बार रोया जो बारिस में
आग लगा दूँगा, उनकी आँखों में...

धर्मप्रेमिका

कभी इश्क किये हैं ?
         नही
क्यों ?
         दर्द बर्दाश्त नही होता

जुल्फों का छांव

बाहर बहुत धूप  है
क्या थोड़ी देर..
जुल्फों का छांव मिलेगा..
#छोटू_जी
मैं लगभग हर परीक्षा पास किया हूँ
बस प्यार का परीक्षा में हर बार असफल रहा हूँ

Tuesday, 14 June 2022

तुमसे मिलकर ना जाने क्यों...

तुमसे मिलकर ना जाने क्यों
और भी कुछ याद आता हैं..
याद आता हैं

उस मोड़ से भी हम गुजरे है
जिस मोड़ पे सब लुट जाता है..
लुट जाता हैं

तुमसे मिलकर ना जाने क्यों...

एक तेरे बिना इस दुनिया की
हर चीज अधूरी लगती है
तुम पास हो कितने पास मगर
नजदीकी भी दुरी लगाती है

तुमसे मिलकर ना जाने क्यों
और भी कुछ याद आता हैं..
याद आता हैं

चित्रपट: प्यार झुकता नहीं (year-1985)
गायक:  Lata Mangeshkar, Shabbir Kumar
संगीतकार: लक्समिकान्त प्यारेलाल 
गीतकार: स. ह. बिहारी

सफर तो बहुत छोटा रहा तुम्हारे साथ 
लेकिन यादगार रहेगी उम्र भर के लिए

Monday, 13 June 2022

युद्ध और प्रेम

जिन्दगी में दो काम अवश्य करें
एक युद्व दूसरा प्रेम

अगर आप जिंदगी के सारे युद्ध हर जाओगे तो फिर भी दुनियाँ के महानतम योद्धा कहलाओगे
अगर सारे प्रेम के रिश्ते में असफल हो जाते हो तो तब तुम्हें प्रेम का सही अर्थ और महत्व समझ पाओगे
अंत में
युद्ध और प्रेम खूब करें, इस से डरे नही।

Sunday, 12 June 2022

हिम्मत की बात अलग है..
दर्द की कहानी अलग से लिखेगें..

Thursday, 9 June 2022

प्यार और अधिकार

प्यार तो सब करता है पर अधिकार की बात कोई नही करता है..!!
शादी तो सब करता है पर बराबर का अधिकार कोई नही देता है..!!

Wednesday, 1 June 2022

मैं कानूनों का जानकार भी हूँ

मैं कानूनों का जानकार भी हूँ
अबकी बार आप अच्छे से ठीक नही हुए तो.
बीमारी पर इतने धारायें लगाऊंगा कि..
फिर ये बीमारी किसी को बीमार नही करेगा

Monday, 30 May 2022

गिरा हुआ पानी

गिरता झड़ना झर झर करता 
बहती नदियां कल कल करती 
पानी का क्या है..वो सब में ढलता 

पानी निश्छल है ,पानी बेरंग है
पानी इज्ज़त है, पानी रंगत हैं
पानी मंजिल है, पानी कहानी है

रुकिए

ठहरा हुआ पानी का आपबीती सुनाता हूँ.
पानी का भूत, वर्तमान, भविष्य सुनाता हूँ

अगले विश्व युद्ध की निशानी है
Pop ग्राउंड की सबकी जुबानी है
सीढ़ी पर पसरा आज की कहानी है
उसके बगल में बैठने में आनाकानी है
यह किसी को नही दिखता 
यह उसकी परेशानी है
एक तरफ गिरा पानी, 
दूसरे तरफ़ खुद को गिराना था
गिरते गिरते उस पर बैठना था
फिर गिरती निगाहों से पानी पानी होना था
गिरते निगाहों/आँखों से पानी भी दिखाना था..
फिर पानी पानी हो उसे दिखाना था..
...
....
और अंत में
धीरे धीरे दिन चढ़ता है
धीरे धीरे पानी सूखता है
धीरे धीरे घुन लगता है
धीरे धीरे बात अनसुना होता है
धीरे धीरे व्यवस्था बिखरता है
धीरे धीरे अविश्वास बढ़ता है
धीरे धीरे आदमी खुद को खोता है
.
.
जाते जाते..
मन मे एक बार ख्याल आया...

एक बार उस पर बैठ कर दिखाते
क्यों नही हम उस पर बैठ पाते 


आज इतनी ही उसकी ख्वाहिश थी

Sunday, 29 May 2022

मैं ही बिहार पुलिस अकादमी हूँ

जाति, धर्म, रंग,क्षेत्र रहित
सब का एक पहचान हूँ
मानव कल्याण का नींव का ईंट हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

देश को समर्पित हूँ 
बढ़ते बिहार का प्रतीक हूँ
मैं पुलिस प्रशिक्षण केंद्र हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

वर्दी का मान सम्मान हूँ
अनुशासन का सर्वोच्च प्रतीक हूँ
बदलते बिहार का संकल्प हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

सभी विधा में पारंगत हूँ
कर्त्तव्य पथ पर सदा त्तपर हूँ
बदलते प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

शांतिमय समाज का द्योतक हूँ
सर्वहित न्याय का पहचान हूँ
मातृभूमि के रक्षा में जान निछावर  करूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

विकट परिस्थितियों का साथी हूँ
असहायों व मुश्किल वक़्त का विश्वासी हूँ
सभी प्रशिक्षु में मानवीय गुन भरता हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ

अमर जवान का जयजयकार हूँ
बिहार पुलिस का शान हूँ
देश का श्रेष्ठ पुलिस प्रशिक्षण संस्थान हूँ
मैं बिहार पुलिस अकादमी हूँ
मैं ही बिहार पुलिस अकादमी हूँ


Thursday, 26 May 2022

मोहब्बत और कानून

वह मोहब्बत का क़ानून जनता है वो

कब अपराध करना है जनता है वो

मेरा इश्क भी शाकाहारी है

मेरा इश्क भी शाकाहारी है

न मिल सकते हैं
न देख सकते हैं
न बात कर सकते हैं
न झगड़ सकते हैं
न  दूर से कुछ कह सकते हैं

बस इतना कह सकते हैं कि
मेरा इश्क सादा भोजन की तरह है

और अंत में
सारी बाते एक तरफ और मैं तुम्हारी तरफ

और हाँ, एक बात..

मुझे तुमसे मोहब्बत है
😘

Tuesday, 24 May 2022

एक बात तुम से कहनी है

एक बात तुम से कहनी है
जो बात तुम से ही छुपानी है

एक मुलाकात तुम से करनी है
जहाँ कभी तुम से नही मिलनी है

एक बात पर तुम्हें रुलानी है
वह बात तुम से हँस कर कहनी है

एक जन्म में तुम से मिलना है
हर जन्म में मिलने का वादा तोड़नी है

Sunday, 22 May 2022

लड़कियां ब्याही जाती हैं

लड़कियां ब्याही जाती हैं 
सरकारी नौकरों से 
ज़मीनों से, 
दुकानों से 
अमीरों से
जाति से
बस वो ब्याही नहीं जाती तो सिर्फ अपने प्रेमियों से। 
- ?

रोटी

रोटी का आकार कुछ भी हो

गोल,तीन कोना, चार कोना, 
और समझ से बाहर

रोटी जितनी भी मोटी और पतली हो
और तन्दूरी हो

उसका प्रथम और अंतिम उद्देश्य
सिर्फ भूख मिटाना है न कि दूसरा चीज

Tuesday, 17 May 2022

दहेज़

दहेज़ के लिए जाति ढूँढनी पड़ती है ।
शादी के लिए पसंद करनी पड़ती है ।।

और अंत में
ये जाति क्यों नही जाती है।
ये दिल किसी कि माने ना

Monday, 16 May 2022

@राहुल जी ,जीवेश जी

अच्छी खासी शुकुन की जिंदगी गुज़र रही होती है ...
फिर अचानक कोई पसंद आ जाता है .. 

उसके बाद.

जिंदगी की ऐसी की तैसी हो जाती है..

और अंत में.

नरक बन जाता  है और जीने की इच्छा खत्म..

फिर क्या

जिंदगी अनुलोमविलोम करना शुरू कर देता है
सांस अंदर लेना और सांस बाहर करना..

बस इतना ही

धर्मप्रेमिका

@इन्द्रकांत

कैसे हो?
          ठीक हूं !
                     तुम कैसी हो?
                                        मैं भी ठीक हूं

उपर की लाइनों का सिटी स्कैन किया जाए तो हजारों गम, लाखों ख्वाहिशें और बेहिसाब अंत किये गए सपने मिलेंगे, और इन सभी पर कल्पति आत्मा, घुटती साँसे, आँखों में न रुकने वाली आँशु के बीच“ठीक हूं कि ओढ़ाई गई चादर मिलेगी"


विरह

"प्यार अगर सच्चा हो तो ‪#‎विरह‬ भी प्यारी लगती है..!
नही तो, बगल में साथ चलते हुए भी ‪#‎शरीर_नज़र‬ आती है..!!"

Wednesday, 11 May 2022

मेरे अंदर जो अच्छाई है वो सिर्फ मैं हूँ
मेरे अंदर जो बुराई है वो कोई और है

Tuesday, 10 May 2022

तू हजारों बार नाराज़ हो जाओ मुझसे...😊!
मैं हर बार मुस्कुरा कर मनाऊँगा तुझे...😊!!

Wednesday, 4 May 2022

अब तो स्वीकार कर लो दोस्त

इस दुनियां में कोई भी अपना नही है..!
यह इतना बड़ा सच है इससे लड़ना नही..
बल्कि बहुत जल्दी स्वीकार कर लेना...!!

Tuesday, 3 May 2022

BPA,घर और घड़ी शौतन कि

ये जो घड़ी जो दीवार पर टँगी है
मुझे ही लगातार देखे जा रही है
जैसे मेरे घर में मेरा विरोधी रह रही है
पिछले जन्म की शौतन लग रही है
खुद की शुई को तेज कर के मुझे जला रही है
हाथे जोड़ बेवश उससे विनती कर रहा हूँ
कुछ देर और घर मे रुकने की इच्छा हो रही है

Monday, 2 May 2022

धर्मप्रेमिका

धर्मप्रेमिका और पत्नी भी किसी पर्व व त्योहार से कम नही होती है...
हर दो, तीन दिनों में मनाना पड़ता है.💐💐☺️☺️

प्रेमी और पति भी घर व आंगन जैसे होते हैं
हर रोज सुबह और शाम झाड़ू लगा के साफ सुथरा  व ठीक रखना होता है..☺️☺️💐💐

Thursday, 28 April 2022

धर्मप्रेमिका

सच्चे मन से देखो तो, वैश्या भी पावन लगती है !!
गलत नज़र से देखो तो, सीता भी कलमुँही लगती है  !!

Wednesday, 6 April 2022

दिल के अरमा आंसुओं में बह गए

जिंदगी ठीक है, पर अच्छी नही
सब कुछ पास है, पर मनपंसद नही
आँखों मे नींद है, पर सोने का वक़्त नही
फॉलइन होते हैं,पर मार्का समय पर हो इच्छा नही
परेड करते हैं, पर थम नही
नल चालू करते हैं, पर पानी नही
मेस तो जाते हैं, पर रहती थाली नही
खाना तो खाते हैं, पर पचता नही
नाप तो देते हैं, पर सीलता नही
वर्दी तो पहनते हैं, पर कहते हैं सटीक पैटर्न नही
क्लास तो जाते हैं, पर समझते कुछ नही
सर पर तेज धूप है, पर छुपने को छाता नही
संडे तो आती है, पर छुट्टी नही
फटीग तो करते हैं, पर कटती घास नही
समस्या तो वे सुनते हैं, पर समाधान नही
TL तो देते हैं, पर PL नही
और अंत में
दरोगा तो बन गयें, पर दिखते चौकीदार से कम नही

Friday, 1 April 2022

यादों की गलियों से..!

कौन क्यों गया छोड़ कर, यह जरूरी नही...
कौन किससे क्या सिख कर गया, ये जरूरी है..
मसला ये नहीं है कि धूप में जलन कितना है,
मुद्दा ये है कि चाँद कि परवाह किसको है ? 

#सवाल

Sunday, 27 February 2022

Monday, 14 February 2022

💐💐💐💐



Tuesday, 9 November 2021

छठ पूजा पर विशेष

क्योंकि ये छठ जरुरी है..

ये छठ जरुरी है ।

धर्म के लिए नहीं, समाज के लिए नहीं ..
जरुरी है हम आप के लिए जो अपनी जड़ों से कट रहे हैं।

उन बेटों के लिए जिनके घर आने का ये बहाना है। उस माँ के लिए जिन्हें अपनी संतान को देखे महीनों हो जाते हैं। उस परिवार के लिये जो टुकड़ो में बंट गया है।

ये छठ जरुरी है उस नई पौध के लिए जिन्हें नहीं पता की दो कमरों से बड़ा भी घर होता है। उनके लिए जिन्होंने तालाब और नदियों को सिर्फ किताबों में ही देखा है।

ये छठ जरुरी है उस परंपरा को ज़िंदा रखने के लिए जो समानता की वकालत करता है।
जो बताता है कि बिना पुरोहित भी पूजा हो सकती है।

जो सिर्फ उगते सूरज को ही नहीं डूबते सूरज को भी सलाम करता है।

ये छठ जरुरी है गागर निम्बू और सुथनी जैसे फलों को जिन्दा रखने के लिए, सूप और दउरा को बनाने वालों को ये बताने के लिए इस समाज में उनका भी महत्व है।

ये छठ जरुरी है उन दंभी पुरुषों के लिए जो नारी को कमज़ोर समझते हैं।

ये छठ जरुरी है,  बेहद जरुरी।

अंत में आप सभी को आस्था के इस पावन पर्व छठ की हार्दिक शुभकामना।।
🙏छठी मइया सबके जीवन मे खुशियां दें🙏

Sunday, 6 June 2021

ये दुनिया अगर मिल भी - Ye Duniya Agar Mil Bhi


Movie/Album: प्यासा (1957)

Music By: एस.डी.बर्मन
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: मो.रफ़ी

ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया
ये इन्सां के दुश्मन समाजों की दुनिया
ये दौलत के भूखे रिवाजों की दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

हर इक जिस्म घायल, हर इक रूह प्यासी
निगाहों में उलझन, दिलों में उदासी
ये दुनिया है या आलम-ए-बदहवासी
ये दुनिया अगर मिल भी...

यहाँ इक खिलौना है इन्सां की हस्ती
ये बस्ती है मुर्दा-परस्तों की बस्ती
यहाँ पर तो जीवन से है मौत सस्ती
ये दुनिया अगर मिल भी...

जवानी भटकती हैं बदकार बन कर
जवाँ जिस्म सजते हैं बाज़ार बन कर
यहाँ प्यार होता है व्योपार बन कर
ये दुनिया अगर मिल भी...

ये दुनिया जहाँ आदमी कुछ नहीं है
वफ़ा कुछ नहीं, दोस्ती कुछ नहीं है 
जहाँ प्यार की कद्र ही कुछ नहीं है  
ये दुनिया अगर मिल भी...

जला दो इसे फूंक डालो ये दुनिया
जला दो, जला दो, जला दो
जला दो इसे फूंक डालो ये दुनिया
मेरे सामने से हटा लो ये दुनिया
तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया
ये दुनिया अगर मिल भी...

Friday, 20 November 2020

धर्मप्रेमिका

जो प्रेम गली में आया ही नहीं
प्रीतम का ठिकाना क्या जाने…

जिसने कभी प्रीत लगाई नहीं
वो प्रीत निभाना क्या जाने…..

Thursday, 2 January 2020

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया…


कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिस काम का बोझा सर पे हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिस इश्क़ का चर्चा घर पे हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो मटर सरीखा हल्का हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना दूर तहलका हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना जान रगड़ती हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना बात बिगड़ती हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें साला दिल रो जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो आसानी से हो जाए…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो मज़ा नहीं दे व्हिस्की का
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना मौक़ा सिसकी का…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसकी ना शक्ल इबादत हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसकी दरकार इजाज़त हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो कहे ‘घूम और ठग ले बे’
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो कहे ‘चूम और भग ले बे’…

वो काम भला क्या काम हुआ
कि मज़दूरी का धोखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो मजबूरी का मौक़ा हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ठसक सिकंदर की
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें ना ठरक हो अंदर की…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो कड़वी घूंट सरीखा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जिसमें सब कुछ ही मीठा हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो लब की मुस्कां खोता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो सबकी सुन के होता हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो ‘वातानुकूलित’ हो बस
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ‘हांफ के कर दे चित’ बस…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना ढेर पसीना हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो ना भीगा ना झीना हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें ना लहू महकता हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो इक चुम्बन में थकता हो…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें अमरीका बाप बने
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो वियतनाम का शाप बने…

वो काम भला क्या काम हुआ
जो बिन लादेन को भा जाए
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो चबा…’मुशर्रफ’ खा जाए…

वो काम भला क्या काम हुआ
जिसमें संसद की रंगरलियां
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ
जो रंगे गोधरा की गलियां…


2


अरे, जाना कहां है…?

उस घर से हमको चिढ़ थी जिस घर
हरदम हमें आराम मिला…
उस राह से हमको घिन थी जिस पर
हरदम हमें सलाम मिला…

उस भरे मदरसे से थक बैठे
हरदम जहां इनाम मिला…
उस दुकां पे जाना भूल गए
जिस पे सामां बिन दाम मिला…

हम नहीं हाथ को मिला सके
जब मुस्काता शैतान मिला…
और खुलेआम यूं झूम उठे
जब पहला वो इन्सान मिला…

फिर आज तलक ना समझ सके
कि क्योंकर आखिर उसी रोज़
वो शहर छोड़ के जाने का
हम को रूखा ऐलान मिला…



लेखक :-पीयूष मिश्रा

हम देखेंगे

हम देखेंगे

लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो लोह-ए-अज़ल[1] में लिखा है
जब ज़ुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां [2]
रुई की तरह उड़ जाएँगे
हम महक़ूमों के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी
और अहल-ए-हक़म के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-ख़ुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा, मरदूद-ए-हरम [3]
मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे

बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ायब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर[4] भी
उट्ठेगा अन-अल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो
और राज़ करेगी खुल्क-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूँ और तुम भी हो

लेखक:-  फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

शब्दार्थ

ऊपर जायें↑ 1  सनातन पन्ना

ऊपर जायें↑ 2 घने पहाड़

ऊपर जायें↑ 3 पवित्रता या ईश्वर से वियोग

ऊपर जायें↑ 4 देखने वाला


कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया 


वो लोग बहुत ख़ुश-क़िस्मत थे

जो इश्क़ को काम समझते थे

या काम से आशिक़ी करते थे

हम जीते-जी मसरूफ़ रहे

कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया

काम इश्क़ के आड़े आता रहा

और इश्क़ से काम उलझता रहा

फिर आख़िर तंग आ कर हम ने

दोनों को अधूरा छोड़ दिया


लेखक :- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Friday, 22 November 2019

आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में,

आने वाले हैं शिकारी मेरे गाँव में,
जनता है चिंता की मारी मेरे गाँव में।
आने वाले हे शिकारी मेरे गाँव में,
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।


फिर वही चोराहे होंगे
प्यासी आखों उठाए होंगे
सपनो भोगी रातें होंगी
मीठी-मीठी बातें होंगी
मालाएं पहनानी होंगी
फिर ताली बजवानी होंगी
दिन को रात कहा जायेगा
दो को सात कहा जायेगा
आने वाले हें- आने वाले हें मदारी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।


शब्दों-शब्दों आहें होंगी
लेकिन नकली बाहें होंगी
तुम कहते हो नेता होंगे
लेकिन वे अभिनेता होंगे
बाहर-बाहर सज्जन होंगे
भीतर-भीतर रहजन होंगे
सब कुछ हे,फिर भी मांगेगे
झुकने की सीमा लाघेगें
आने वाले हें भिखारी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।


उनकी चिंता जग से न्यारी
कुर्सी हे दुनिया से प्यारी
कुर्सी हे तो भी खल्कामी
बिन कुर्सी के भी दुस्कामी
कुर्सी रास्ता कुर्सी मंदिर
कुर्सी नदियां कुर्सी शाहिल
कुर्सी पर ईमान लुटायें
सब कुछ अपना दावं लगायें
आने वाले हैं- आने वाले हैं जुआरी मेरे गाँव में
जनता हे चिंता की मारी मेरे गाँव में।

#वरिष्ठ_गीतकार_श्री_राजेंद्र_राजन_जी_की_प्रस्तुति


Sunday, 1 September 2019

गाना / Title: जिहाल-ए-मस्ती, मकुन-ब-रन्जिश - jihaal-e-mastii, makun-b-ranjish

चित्रपट / Film: Gulaami 1985
गीतकार / Lyricist: गुलजार-(Gulzar)
गायक / Singer(s): लता मंगेशकर-Lata Mangeshkar - Shabbir Kumar

जिहाल-ए-मस्ती मकुन-ब-रन्जिश,
बहाल-ए-हिज्र बेचारा दिल है

सुनाई देती है जिसकी धड़कन
तुम्हारा दिल या हमारा दिल है

वो आके पहलू में ऐसे बैठे
के शाम रंगीन हो गई है (३)
ज़रा ज़रा सी खिली तबीयत
ज़रा सी ग़मगीन हो गई है

(कभी कभी शाम ऐसे ढलती है
के जैसे घूँघट उतर रहा है ) - २
तुम्हारे सीने से उठ था धुआँ
हमारे दिल से गुज़ार रहा है

ये शर्म है या हया है क्या है
नजर उठाते ही झुक गयी है
तुम्हारी पलकों से गिरके शबनम
हमारी आँखों में रुक गयी है

खुसरो का वह गीत जिससे गुलज़ार को प्रेरणा मिली थी।

अमीर खुसरो ने एक गीत (तकनीकी तौर पर इसे क्या कहेंगे मैं नहीं बता सकता) लिखा जिसकी खासियत यह थी कि इसकी पहली पंक्ति फ़ारसी में थी जबकि दूसरी पंक्ति ब्रज भाषा में। फ़िल्म के गीत की तर्ज पर ही खुसरो के इस गीत को भी पढ़ें। गजब के शब्द.. कमाल की शब्दों की जादूगरी।

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, (फ़ारसी)
दुराये नैना बनाये बतियां | (ब्रज)
कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, (फ़ारसी)
न लेहो काहे लगाये छतियां || (ब्रज)

शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़
वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह, (फ़ारसी)
सखि पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां || (ब्रज)

यकायक अज़ दिल, दो चश्म-ए-जादू
ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं, (फ़ारसी)
किसे पडी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियां || (ब्रज)

चो शमा सोज़ान, चो ज़र्रा हैरान
हमेशा गिरयान, बे इश्क आं मेह | (फ़ारसी)
न नींद नैना, ना अंग चैना
ना आप आवें, न भेजें पतियां || (ब्रज)

बहक्क-ए-रोज़े, विसाल-ए-दिलबर
कि दाद मारा, गरीब खुसरौ | (फ़ारसी)
सपेट मन के, वराये राखूं
जो जाये पांव, पिया के खटियां || (ब्रज)

चाहें अमीर खुसरो हों जिनके सूफ़ी गीत आज भी उनके चाहने वालों की पहली पसंद हैं और चाहें गुलज़ार जो पिछले पाँच से छह दशकों से एक के बाद एक नायाब गीत हमें दे रहे हैं.. दोनों का ही अपने क्षेत्र में कोई मुकाबला नहीं।

Friday, 9 November 2018

अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!

चाहता था जब हृदय बनना तुम्हारा ही पुजारी,
छीनकर सर्वस्व मेरा तब कहा तुमने भिखारी,
आँसुओं से रात दिन मैंने चरण धोये तुम्हारे,
पर न भीगी एक क्षण भी चिर निठुर चितवन तुम्हारी,
जब तरस कर आज पूजा-भावना ही मर चुकी है,
तुम चलीं मुझको दिखाने भावमय संसार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
भावना ही जब नहीं तो व्यर्थ पूजन और अर्चन,
व्यर्थ है फिर देवता भी, व्यर्थ फिर मन का समर्पण,
सत्य तो यह है कि जग में पूज्य केवल भावना ही,
देवता तो भावना की तृप्ति का बस एक साधन,
तृप्ति का वरदान दोनों के परे जो-वह समय है,
जब समय ही वह न तो फिर व्यर्थ सब आधार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
अब मचलते हैं न नयनों में कभी रंगीन सपने,
हैं गये भर से थे जो हृदय में घाव तुमने,
कल्पना में अब परी बनकर उतर पाती नहीं तुम,
पास जो थे हैं स्वयं तुमने मिटाये चिह्न अपने,
दग्ध मन में जब तुम्हारी याद ही बाक़ी न कोई,
फिर कहाँ से मैं करूँ आरम्भ यह व्यापार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
अश्रु-सी है आज तिरती याद उस दिन की नजर में,
थी पड़ी जब नाव अपनी काल तूफ़ानी भँवर में,
कूल पर तब हो खड़ीं तुम व्यंग मुझ पर कर रही थीं,
पा सका था पार मैं खुद डूबकर सागर-लहर में,
हर लहर ही आज जब लगने लगी है पार मुझको,
तुम चलीं देने मुझे तब एक जड़ पतवार प्रेयसि!
अब तुम्हारा प्यार भी मुझको नहीं स्वीकार प्रेयसि!
~ गोपालदास "नीरज"

Tuesday, 20 February 2018

जय राज संग स्नेहा भारती

तेरे हर घर द्वार को आज मैं,आठो धाम लिखता हूँ
मिलन के इस अर्द्ध रात को आज अपने जीवन का सवेरा लिखता हूँ
अपनी सारी चल अचल साँसे तेरे नाम लिखता हूँ
गंगोत्री से गंगासागर तक खुद को समर्पित कर तेरे नाम लिखता हूँ
तेरी हर खुशी को अपनी खुशी मानूंगा ऐ बात सर झुका कर लिखता हूँ

तेरी माथे की बिंदिया को अपने जीवन का उगता हुआ सूरज लिखता हूँ

तेरी पाँव के रुनझुन को अपने जीवन का धुन लिखता हूँ
अपनी धड़कन का नाम भी, आज से तेरा ही नाम रख दिया हूँ यह बात भी लिखता हूँ

मैं राम तो नही फिर भी सीता समझ कर तुम्हें स्वीकार करता हूँ

सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए ....
हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं...!!

Monday, 5 February 2018

पैडमैन

तमिलनाडु के अरणाचलम मुरगनाथम की बायोपिक #पैडमैन के रिलीज होनें के बाद भी शायद स्थिति कमोबेश वही रहेगी...
इस फ़िल्म को लेकर मुझे कोई ज्यादा उम्मीद नही है क्योंकि रील लाइफ और रियल लाइफ में अंतर होता है।
समस्या पहले भी और आगे भी रहेगी क्योंकि प्रश्न वही पुराना है??

ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी पैड का इस्तेमाल क्यों नही करती है ? शायद नही बल्कि यही उत्तर है
1. ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी पैड खरीदने में सक्षम नही है..अधिकांशतः कपड़ों का उपयोग करती है
2. उन तक सेनिटरी पैड की पहुँच नही है
3. उन्हें यह मालूम है या नही की सेनिटरी नैपकिन किस बला का नाम है,आखिर होता क्या है
4. नैपकिन की खरीदारी और उपयोग में संकोच एवं शर्म आना
5. मूलतः गाँव मे सेनिटरी पैड सहज व सुलभ नही है
6. पुरुषों से ग्रामीण महिलाएं सेनिटरी नैपकिन माँग ही नही सकती है।
7. शहरों में आज भी दुकानदार पैड को काली पॉलीथिन में देते हैं तो ग्रामीण स्तर की हालत और भी खराब है।

#सुझाव
1. खरीदनें में आसानी हो इसके लिए सेनिटरी नैपकिन/पैड का नाम बदल कर # सहेली कर दिया जाए..
2. महिला स्वंय सहायता समूह और आशा के मदद से ग्रामीण स्तर पर इसका निर्माण किया जाए ताकि उपयोग में सहजता एवं लागत और खरीदने में आसानी हो
3. ग्रामीण स्कूल में बालिकाओं के लिए निःशुल्क सहेली (पैड) का वितरण
4. महिला के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे पर ग्रामीण स्तर पर चौपाल का आयोजन जिसमें महिला भी शामिल हो

#सहेली(पैड) के निर्माण कंपनी के लिए दिशा निर्देश
1. महिला द्वारा सहेली के उपयोग के बाद उसे फेंकने का उचित प्रबंधन किया जाए ताकि सफाईकर्मी (कूड़ावाला) उस से दूरी नही बनायें। सुझाव के तोर पर सहेली के निर्माण कंपनी को प्रति सहेली(पैड) फेंकने के लिए अलग रैपर या पैकेट की व्यवस्था, सहेली के खरीदारी के साथ ही दिया जाए ताकि महिलाओं को फेकने में दिक्कत ना हो।
2. सहेली के tv पर प्रचार-प्रसार करते वक्त नीली स्याही का प्रयोग करता है। उसके बदले लाल स्याही का प्रयोग करे ताकि लोगों को इसकी सच्चाई पता चले और इसको लेकर समझदारी बढ़े।

#सरकार से आग्रह
1. सभी स्कूलों, कॉलेज, स्टेशन, बस स्टॉप और सरकारी भवन में सहेली-बॉक्स लगाया जाए ताकि महिला निःशुल्क वहाँ से सहेली प्राप्त कर सके
2. सहेली पर किसी तरह का कर (GST) नही लगाया जाए
3. महिलाओं को महीनें में 2 दिन विशेषावकाश(प्रकृति अवकाश) सभी सरकारी, गैर सरकारी, संगठित और गैर संगठित क्षेत्र में लागू किया जाए वो भी बिना पूर्व आवेदन के।

और अंत में
जो लिख रहा हूँ उसका संबंध मातृत्व की पहचान से है, सृष्टि सृजन करता का अस्तित्व की निशानी से है!!